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ऊ माई जौन अमृत पियवले रहली, आज अधे पेट काटत बारी रात। ऊ माई जौन अंचरा में लुकवले रहली, टुटही पलानी में झेलत बारी बरसात। ऊ माई जौन तेल-कुर कईले रहली, आज दिमाग के कमजोर बारी कहात। ऊ माई जौन काजर-टिका लगवले रहली, घर के चमक में करिया दाग बारी हो जात। ऊ माई जौन 'माई' कहे के सिखवले रहली, तनी सा बोलला पर जात बारी डंटात। ऊ अनपढ़ माई जौन पढ़े खातिर जगवले रहली, आज सबका बीच जाहिल में बारी गिनात। ऊ माई जौन पतोह पसन कईले रहली, ओही पतोह के 'माई' अब नईखी सोहात। ऊ माई जौन बबुआ के हीरा बूझले रहली, उहे हीरा बुझता माई के खैरात। ऊ माई जौन बुझ जात रहली, बबुआ के मन के बात। आज बबुआ के नइखे सुनात माई के सिसकी भरल रात।
खदेरन के पाठशाला 5 (क्लास में लईका कौनो बेंच प बईठल बा कौनो खिड़की प बईठल बा,खदेरन बेंच बजावता आ ढोंढ़वा भोकार पार के गावत बा- शीलवा रहे की फूलमतिया,रतिया कहाँ बितावला ना...मास्टर साहेब के एंट्री) मास्टर साहेब-बताई हम...बता दी का की रतिया कहाँ बितवनी...चार-चार सोटा घिचेम सभनी के की रात-दिन सब याद परे लागी..चल के बईठो सब.. पढाई-लिखाई में तेरे-बाइस आ खाली लाफेरियई करता है सब...अबकी परीक्षा में बुझवाते हैं। चला लोग किताब निकाल आ बताओ की काल कौन पाठ पढाई हॉट रहे.. ढोंढा- ए मार्सायेब 5वाँ पाठ होई आज.. मास्टर साहेब-ठीक है बहुत बन्हिया,हमको त बुझाया की खाली गीते-गवनई होता है...बैठो..ह त 5वाँ पाठ बा बिहार के राजनीति..फेर दांत चियारने लगा रे खदेरन,अभी पढाई शुरू न भइल ताले बैताल समां गइल तहरा लोग में...उठ..बताओ-बिहार के पहिला मुख्य मंत्री के रहे? खदेरन-नितीश कुमार मास्टर साहेब-बाक! उ कहाँ से हो गई...उस टाइम त इनका जन्मो का जाने हुआ होगा की नहीं. खदेरन-बाकी माटसाहेब हम त अपना होस भर से इनके के देखत बानी... मास्टर साहेब- अच्छा चल हामरो पता नइखे ओहिसे मान लेत बानी..बईठो...देखो त खड़े-खड़े ब...
#खदेरन_के_पाठशाला_4 (गाना बाज$ता मोबाइल में,लईका मस्त होके नाचत बारन स-"आरा जिला उखाड़ देला किला" तले मास्टर साहेब के एंट्री) मास्टर साहेब- बंद कर$ स जाल्दी ना त मार सटहा के सभनी के भाभोर देम....इ इस्कूल ह की नाच घर,कौनो चेकिन वाला आ गइल त हमार नोकरी खा जईबा स..कौना के मोबाइल बा रे? ढोंढा-मारसयेब इ हमरा चाचा के ह, मास्टर साहेब-दे एगो कॉल करे के बा,ससुरार बतियावला ढेर दिन हो गइल...(ताले खदेरन लउक जाता) कहाँ रहेला खदेरन बाबु 10 के आइला ना... खदेरन- मास्सयेब हमरा जवार में राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मलेन रहल ह आ हमहू ओहमे भाग लेले रहनी ओहिसे ना आईनी...रउवा ना आईनी काहे? मास्टर साहेब- का रलक....भोजपुरी सम्मेलन,अभिये से टंडइली करे लगला.. खदेरन- मास्सयेब माई भाखा भोजपुरी खातिर जतना लो काम करत बा का उ लोग टंडइली करत बा? मास्टर साहेब- अभी तहरा न बुझाई तहार पढ़े लिखे आला समय बा जियान मत कर$.. खदेरन- मास्सयेब रउवा जइसन लोग के हमार चाचा खोजेले...कहेले की अइसन लोग के वजह से ही भोजपुरी अपमानित बिया.. मास्टर साहेब- ढेर बहसला  त मार के सॊझे क देम..का लरी लो जे सरकार त भोजपुरी के दर्जा...
#खदेरन_के_पाठसाला_3 मास्टर साहेब-ह त हम कह रहे थे नु की हमारे परधानमंत्री जी मन की बात करते हैं रेडियो पर,उसमे उ बाड़ा बन्हिया बन्हिया बात बोलते हैं... ढोंढा-ऐ मास्सायेब सुनी ना...ए मस्सायेब.. मास्टर साहेब-का है का मस्सयेब मस्सायेब कर रहा है पेसाब करने जाना है त जाओ ना..बीच में टोक के बात भुलवा देता है.... ढोंढा-पेसाब करे नइखे जाये के नु... मास्टर साहेब- तब का चिचिया रहा था..बोलो... ढोढा-खदेरन हमरा से बतियावत बारन फेर रउवा ध लिहिले त हमरा के मुर्गा बना दिहिले... मास्टर साहेब-साफा नहीं सुधरने का किरिया खा लिया है का रे खदेरन...खारा हो जाओ...बोलो का बात है की तुम्हारा बतियाना खतमे नहीं होता है.. खदेरन-मस्सायेब हमहू त आपन मन के बात कहत रहनी ह... मास्टर साहेब- का है तुम्हारे मन का बात बोलो... खदेरन- हम कहत रहनी ह की रउवा त भोजपुरी में कई गो किताब लिखले बानी,राउर बड़ा नाम बा,भोजपुरी के पत्रिका भी छापिले (मास्टर साहेब खुश होत बारें)..ओकर लड़ाई लड़तानी...बाकी राउर लईकिया त हिंदीये में बोलेले..काल्हे रउवा घरे फेन्सा देवे गइल रहनी त मैडम जी भी हिंदिये बोलत रहवी...मास्सयेब इ ...
‪#‎ खदेरन_के_पाठसाला_ 2 मास्टर साहेब- ए रहमान खड़ा होखो,बताओ दू दिन से काहे नहीं आया था,पता है तुम योगा का कितना निम्मन क्लास छोड़ दिया? रहमान-मास्टर साहेब हमरा बोखार लाग गइल रलक ह,दरखासो ले आइल बानी अब्बा से हस्तक्चर करवा के.. मास्टर साहेब- लाओ इधर दो दरखास.. खदेरन- ना मस्सायेब,हमनी से कहत रलन ह नु की इनकर अब्बा कहलन की तोरा योग नइखे करे के,हमनी में योगा ना कईल जाला...भले इस्कूल मत जो दू दिन बाकी योगा-सोगा नइखे करे के.. मास्टर साहेब- इ बात सही बा रहमान? रहमान-जी ना सर,खदेरना झूठ बोलता... खदेरन-हम झूठ बोलतानी.. निकल बहरी त कोसी भारत बानी आज तोर.. मास्टर साहेब-ढेर बोलेगा तुमलोग त दुनु का कोसी हम भर देंगे..सच सच बताओ रहमान ना त घामा में 1 घन्टा खारा करवा देंगे.. रहमान-जी सर...खदेरन सही कहता....अब्बा कहले ह की एक दिन के योग कईला से का हो जाई? मास्टर साहेब-तुम त साफ़ बुड़बक निकला,इ बताओ कौनो सवाल कैसे बनाना है ई हम एक ही दिन न बताते हैं ओकरा बाद तुम खुद उसको बनाते हो त सीखते हो...उसी तरह से ई भी एक ही दिन बताया जाता है आ उसके बाद तुम रोज करो आ फायदा देखो... खदेरन-सूर्यनमस्कार से नु दिक्कत ...
‪#‎ खदेरन_के_पाठसाला_ 1 ... मास्टर साहेब- ए खदेरन नहीं मानेगा का रे फेर बतिया रहा है किसी दिन दिमगवा ख़राब हुआ ना त मार के पीठ तुड़ देंगे....उठ खारा होख आ बताओ की आज का बतिया रहा है... खदेरन-मस्सायेब हई छेदिया के बेटवा नु हमरा से बतियावेला मंगरुआ... मास्टर साहेब- तमीज से बोलो नहीं त मार हुडा के घोघ फुला देंगे...बताओ का बतिया रहा है... खदेरन- मस्सायेब इ कहता की पूरा दुनिया योग करी आ प्रधानमंत्री भी करिहन आ दूका दूका.. मास्टर साहेब- ए मंगरू तुमको भी ढ़ेर बतियाने का सौख हो गया ह त पढने का आते हो जाओ नेता बन जाओ...उठो खदेरन आ बताओ की दहेज़ प्रथा क्या है...5 लाइन बोलो.. खदेरन- मस्सायेब दहेज़ पर्था बड़ा ख़राब दोष ह...पढ़े साल हमरा दीदी के बियाह भइल जी आ हमर बाबूजी लड़िका वाला के मांग के हिसाब से 4 लाख रुपया दे देहलन, खाली मोटरसाइकिल न दियाईल त तिलक लौटत रहे...बड़ा रो-गा के बाबूजी ओह लो के मनाईलें आ बिहान भइला 60 हज़ार रुपया सुध पर लेके गाड़ी दियाईल...तब बियाह भइल....आज हमरा घरे एक्को पईसा नइखे आ 60 हजार बढ़ के 80-90हजार हो गइल बा...खेत बेंच के सुध भराइल ह,माई इहे सोच में बेमार रहेले आ बाबूजी पईसा कम...
वो कॉलेज के दिन अधपकी जवानी शैतानियों का मौसम याद है मुझे। वो नए-नए दोस्त  नया-नया कैंपस  लड़कियों से मिलना  याद है मुझे। वो कैंटीन में साथ जाना इलायची चाय मंगाना पैसे पर उलझ जाना याद है मुझे। वो उनसे निगाहों का मिलना दिल में इश्क-कली खिलना पक्का आशिक बन जाना याद है मुझे। वो साथ में फ़िल्में देखना करना मिलने का बहाना वो सारी कसमें खाना याद है मुझे। वो हम दोनों का बिछड़ना घुट-घुट के रोज मरना दर्द में आंहें भरना याद है मुझे। वो इस तरह दिल का टूटना प्राण-प्रिय का साथ छूटना अधूरे प्यार की पूरी कहानी याद है मुझे।