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जुलाई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
पाहिले चिट्ठी के जमाना रहे अब फ़ोन आ इन्टरनेट के बा ... गाना देखी ..... सइयां भइले निर्मोही ए सखी हो फ़ोन न उठावे ... फ़ोन न उठावे सखी हो फोने न उठावे सइयां ............ फेसबुक पर लागल रहे दिन आउर रतिया हो करेनी चैटिंग खूबे भेजेनी पातिया हो कौनो जवाब नाही देला ए सखी हो ... फ़ोन न उठावे सइयां ............. हाईक पर ऑनलाइन रहे सब संघतिया हो राजा से करे चाहीं प्यार भरल बतिया हो वाट्सऐप भइल सौतिनिया ए सखी हो ... फ़ोन ना उठावे सइयां ..... सइयां भइले निर्मोही ए सखी हो फ़ोन न उठावे ... फ़ोन न उठावे सखी हो फोने न उठावे ( लव कान्त सिंह )