ऊ माई जौन अमृत पियवले रहली,
आज अधे पेट काटत बारी रात।
ऊ माई जौन अंचरा में लुकवले रहली,
टुटही पलानी में झेलत बारी बरसात।
ऊ माई जौन तेल-कुर कईले रहली,
आज दिमाग के कमजोर बारी कहात।
ऊ माई जौन काजर-टिका लगवले रहली,
घर के चमक में करिया दाग बारी हो जात।
ऊ माई जौन 'माई' कहे के सिखवले रहली,
तनी सा बोलला पर जात बारी डंटात।
ऊ अनपढ़ माई जौन पढ़े खातिर जगवले रहली,
आज सबका बीच जाहिल में बारी गिनात।
ऊ माई जौन पतोह पसन कईले रहली,
ओही पतोह के 'माई' अब नईखी सोहात।
ऊ माई जौन बबुआ के हीरा बूझले रहली,
उहे हीरा बुझता माई के खैरात।
ऊ माई जौन बुझ जात रहली,
बबुआ के मन के बात।
आज बबुआ के नइखे सुनात
माई के सिसकी भरल रात।
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