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‪#‎खदेरन_के_पाठसाला_1...
मास्टर साहेब- ए खदेरन नहीं मानेगा का रे फेर बतिया रहा है किसी दिन दिमगवा ख़राब हुआ ना त मार के पीठ तुड़ देंगे....उठ खारा होख आ बताओ की आज का बतिया रहा है...
खदेरन-मस्सायेब हई छेदिया के बेटवा नु हमरा से बतियावेला मंगरुआ...
मास्टर साहेब- तमीज से बोलो नहीं त मार हुडा के घोघ फुला देंगे...बताओ का बतिया रहा है...
खदेरन- मस्सायेब इ कहता की पूरा दुनिया योग करी आ प्रधानमंत्री भी करिहन आ दूका दूका..
मास्टर साहेब- ए मंगरू तुमको भी ढ़ेर बतियाने का सौख हो गया ह त पढने का आते हो जाओ नेता बन जाओ...उठो खदेरन आ बताओ की दहेज़ प्रथा क्या है...5 लाइन बोलो..
खदेरन- मस्सायेब दहेज़ पर्था बड़ा ख़राब दोष ह...पढ़े साल हमरा दीदी के बियाह भइल जी आ हमर बाबूजी लड़िका वाला के मांग के हिसाब से 4 लाख रुपया दे देहलन, खाली मोटरसाइकिल न दियाईल त तिलक लौटत रहे...बड़ा रो-गा के बाबूजी ओह लो के मनाईलें आ बिहान भइला 60 हज़ार रुपया सुध पर लेके गाड़ी दियाईल...तब बियाह भइल....आज हमरा घरे एक्को पईसा नइखे आ 60 हजार बढ़ के 80-90हजार हो गइल बा...खेत बेंच के सुध भराइल ह,माई इहे सोच में बेमार रहेले आ बाबूजी पईसा कमाए दिल्ली गइल बाडन....मस्सायेब एतने पता बा दहेज़ के बारे में..
मस्सयेब- अब से तुम्हारा कॉपी किताब का खर्चा हम देंगे...बईठो मन लगा के पढो...

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