सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सड़क के अरिया

सड़क के अरिया रहनी खाड़ा पसेना से भींजल तर बेचारा ताले लउकल अइसन दृश्य की बदल गइल मौसम सारा। उ लईकी ना रहली हूर रहली पाकत घामा में काहे मजबूर रहली सड़क के दोसरा ओरी ठार बाकि हमरा से बहुत दूर रहली। हम तकनी ह मुस्का के आ उ हंस देली चोना के मारनी मौका पर चौक हम ईशारा कईनी ह हाथ हिलाके। बस सड़क पार करे में लाग गईनी राह मिलल खाली त भाग गईनी मुश्किल से क लेनी सड़क पार आ उनका अरिया जाके लाग गईनी। अब हथवा लागल काँपे समय के लगनी भाँपे हिम्मत क के पूछिये देनी चाय पिये चलबू कहाँ पे? ऊ तकली हमरा ओरी कांच-कुंआर छोरी आ ताली पीट के कहली आय हाय ऐ चिकने 10 रूपए देदे...। -: लव कान्त सिंह :-