सड़क के अरिया रहनी खाड़ा पसेना से भींजल तर बेचारा ताले लउकल अइसन दृश्य की बदल गइल मौसम सारा। उ लईकी ना रहली हूर रहली पाकत घामा में काहे मजबूर रहली सड़क के दोसरा ओरी ठार बाकि हमरा से बहुत दूर रहली। हम तकनी ह मुस्का के आ उ हंस देली चोना के मारनी मौका पर चौक हम ईशारा कईनी ह हाथ हिलाके। बस सड़क पार करे में लाग गईनी राह मिलल खाली त भाग गईनी मुश्किल से क लेनी सड़क पार आ उनका अरिया जाके लाग गईनी। अब हथवा लागल काँपे समय के लगनी भाँपे हिम्मत क के पूछिये देनी चाय पिये चलबू कहाँ पे? ऊ तकली हमरा ओरी कांच-कुंआर छोरी आ ताली पीट के कहली आय हाय ऐ चिकने 10 रूपए देदे...। -: लव कान्त सिंह :-