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नवंबर, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
खदेरन के पाठशाला 8 (सभे क्लास में जहां तहां बईठल बा) खदेरन-जानत बारे ढोंढा भाई...एगो आउर नाया गाना हमार छोटका बाबूजी लिखले ह आ अपना दोस्त से गवईहें.. ढोंढा-सुनाओ मरदे तनी हमनियो के.. एतना त तुही गा लेबे अभी. लबेदा-रे धरिछ्ना के पोता केंवरिया ओठगा दे ना त माहटर जी आ जइहें.. (खदेरन अलाप लेके शुरू करत बा,जैसे कौनो बड़का व्यास होखो) दीयरी लेया दी ना सजन जी दीयरी लिया दी ना, की आइल-3 दीयरी के तेवहार बलम जी दीयरी ले आ दी ना.... (मास्टर साहेब गेट खोल के प्रवेश) मास्टर साहेब-रे इ केंवारी लगा के कौन मजमा लगाईले है जी तुम सब भागो अपना अपना बेंच प नहीं त हूंक के जियान क देंगे...ए खदेरन तुम खाड़ा होखो,ढेर ब्यास बनोगे त जानते हो की नहीं हम लगेंगे गवाने त सब सुर बेसुरा कर देंगे.. खदेरन-ऐ मास्सायेब रउरा पाहिले गीतवा के भाव सुनी तब नु.. मास्टर साहेब-हम का सुनी....आरे हम त अपना ज़माना के टॉप ब्यास रही पुछिह अपना बाबूजी से.. ढ़ोंढा-ह मारसयेब साँचो पहिले गीतवा के भाव जान जाई...भाव ई बा की दियरी से दिवाली मनावे के चाहीं,चाईनीज भुकभुकवा बत्ती से ना... मास्टर साहेब-ह नु जतना बन्हिया उ सतरंगिया...
खदेरन के पाठशाला 7 (ढेलवा फाटक बाबा के लड़िका नथुनी के भुईयाँ पटक के मार रहल बा,बाकी लोग लिलकारता आ थपरी पीट-पीट के माजा ले रहल बा,मास्टर साहेब के साथे खदेरन के एंट्री होता,सब लोग भाग के अपना सीट पर पहुँच जाता आ ढ़ेलवा आ नथुनी धरा जाता) मास्टर साहेब-ऐ,काहे मारा-मारी होता..हम 5 मिनट लेट का हो गइनी भुभुनरंगौवल चालू...(दुनु के 4-4सोटा) अब बताओ तुम लोग काहे झगड़ा कर रहा था। ढ़ेलवा-मास्टर साहेब नथुनिया हमरा माई-बहिन के गरियावत रलक ह। नथुनी-ना मारसायेब इहो हमरा के गरीयवलक ह। मास्टर साहेब-ऐ जी तुम लोग पढने आता है की गारा-गारी करने...अब से सुन लिए त मार के पीठास फार देंगे,हई देखो खदेरन को वाद-विवाद प्रतियोगिता में जीत के हमारा नामवा रोसन करके आया है आ तुम लोग अभी गारीये-फकरी में लागल हो... खदेरन-हम जानत रनी ह की एक दिन ई होई काहे की 5-7 दिन से एक्नी ओल-बोल मारत रलन ह स। मास्टर साहेब-ऐ नथुनी तुम बताओ जी का बात है,खड़ा होक बोलो... नथुनी-मारसायेब ई गरिया देलें ह त हम मार देनी ह। मास्टर साहेब-आरे त हम उहे नु पूछ रहे हैं की ई काहे गरियाया है भांग खाके नहीं नु आया होगा... ढ़ेला-गुरुजी हम ...
खदेरन के पाठशाला 6 (क्लास के सारा लईका भीड़ लगवले बारन स... खदेरन आ ढोंढा मिलके लबेदवा के हुंक रहल बा लोग..मास्टर साहेब के एंट्री) मास्टर साहेब-ए ई का भीड़ लगा के रखा है जी तुम लोग..(सब अपना-अपना सीट पर भागत बारन स) नहीं मानेगा का तुम लोग...इ लड़ाई काहे कर रहा था तुम लोग...ए लबेदवा तू बताव काहे ई तोहर कोसी भरत रलन ह स.. लबेदा-मारसायेब हम कुछो न कईनी ह...आ इ लोग अइसही मारे लागल ह...हई देख ली हमार ठोढ़ फुला देले बा लो मार के...टिफ़िन के बेरा हम बतावत बानी एक्नी के.. मास्टर साहेब-पिटाईयो के नहीं मानेगा का जी....बईठो...ए खदेरन तुम खारा होखो..का बात है हमको सही सही बताओ नहीं त तीनो जाना को मार के भुसौल झार देंग.. ढ़ोंढा-मारसयेब हम बताई का.. मास्टर साहेब- ह तुही बताओ...? ढ़ोंढा-मारसायेब हमार बी.पी तुरंत हाई हो जाला जब कौनो नतिया हमरा घर-जवार आ राज्य के बारे में बोलेला तब... मास्टर साहेब-साफा बकलोल हो का जी...गारी-फकरी मत दो नहीं तो बी.पी का सब गर्मी झार देंगे दुईये सोटा में..होस में रह के बतिया बता दो नहीं तो दुनु को बेहोस क देंगे.. ढ़ोंढा-ठीक बा मारसायेब...हई लबेदवा हमनी के बिहार के बी...