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छात्रों के प्रति साजिश की जा रही है-विवेक

छात्र राजनीती , जिसे मुख्यधारा की राजनीती का लौंच पैड कहा जाता है आज खतरे में है। लिंगदोह कमिटी की सिफारिशों ने राजनीती की नर्सरी को बहुत नुकसान पहुचाया कई। kai ऐसे प्रमुख विश्वविद्यालयों में चुनाव बंद है जो देश को अच्छे-अच्छेराजनेता,विचारक और शिक्षाविद देती है। इस पुरे प्रकरण क लिए एक कहावत फिट बैठती है-"खेत खाए गधा,मार खाए जोलहा"।दरअसल केरल के एक विश्वविद्यालय में बढ़ रहे मार-पीटऔर गुंडागर्दी के कारण जे.एम.लिंगदोह की अध्यक्षता में कमिटी बिठा दी। इसी कमिटी ने अपनी सिफारिश दी,जिसके विरोध में JNU,DU जैसे विश्वविद्यालय में चुनाव रोक दिया गया। डी.यू में तो उन्ही शर्तों पर चुनाव करा लिया गया लेकिन जे.एन.यू में पिछले ३ साल से चुनाव बंद है। जे.एन.यू के छात्रों ने लिंगदोह की कुछ सिफारिशों पर घोर आपत्ति जताई और प्रशासन ने चुनाव बंद करा दिया। JNU-ABVP के महामंत्री विवेक विशाल का कहना है की-"ये सब छात्र राजनीती को बंद करने की साजिश है। इसमें दो राइ नहीं की कैम्पस में चुनाव न होने की वजह से पूरी की पूरी बैच बिना राजनीती देखे ही निकल जाएगी । ऐसा माना जाता है की छात्र राजनीती से ही...