सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जनवरी, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ये उदारता कहीं ले न डूबे

निश्चित रूप से भारत सनातनी परंपरा का देश है और ‘अतिथि देवो भव’ का संस्कार हमारी रगों में समाया है। पिछली सहस्राब्दियों में हमने अनगिनत समुदायों को अपने यहां प्रश्रय दिया। अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण जब यहूदी और पारसी अपने मूल स्थान पर सताए जा रहे थे तो हमने बाहें फैला उनका स्वागत किया। उन्हें हमारे देश में वह आजादी मिली जो वे अपनी मातृभूमि में खो चुके थे। अतीत की यह उदारता कहीं न कहीं आज भी हमारे समाज में विद्यमान है। अगर ऐसा नहीं होता तो अफगानी, बर्मी, तिब्बती तथा श्रीलंकाई शरणार्थियों की बड़ी संख्या हमारे देश में भला आज कैसे चैन से रह पाती। यहां इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि जहां हमने अपने आतिथेय (मेजबान) होने का धर्म निभाया तो वहीं इन समुदायों ने अपने अतिथि धर्म का भी बखूबी पालन किया। हमारे और अपने हितों में टकराव की स्थिति उन्होंने कभी पैदा नहीं होने दी। लेकिन पिछले कुछ दशकों से एक समुदाय ने हजारों सालों की इस आदर्श स्थिति को तार-तार कर दिया है। यह समुदाय है बांग्लादेशियों का। 1971 में जब उन्हीं के धर्म और उन्हीं के ‘राष्ट्र’ के लोगों ने मानवता की सारी हदे...

आरोपी फरार

३६ सुरक्षा कर्मियों की हत्या का आरोपी फरार........ झारखंड के चाईबासा जिले में लचर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाते हुए तीन कुख्यात नक्सली रविवार देर रात मंडल कारागार से भाग निकले। ये माओवादी 36 सुरक्षाकर्मियों की हत्या के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं। पुलिस ने फरार नक्सलियों की धर-पकड़ के लिए पूरे प्रदेश में अभियान छेड़ दिया है। पुलिस के अनुसार फरार हुए नक्सली निर्भय उर्फ रघुनाथ हेंब्रम को सन 2007 में और संदीप उर्फ मोती लाल सोरेन को सन 2009 में गिरफ्तार किया गया था। जबकि धीरेन महतो उर्फ उत्तम को बीते दिसंबर महीने में धनबाद से इस जेल में लाया गया था। बताया गया है कि रात में निर्भय ने अस्वस्थता की शिकायत कर संतरी से दवा मांगी थी। संतरी दवा लाने के लिए गया। इसी दौरान मौके का फायदा उठाते हुए तीनों नक्सलियों ने ताले को काटकर दरवाजा खोल लिया। भागते नक्सलियों का हथियारबंद संतरी से आमना-सामना भी हुआ। लेकिन संतरी ने गोली चलाने के बजाय केवल शोर मचाकर भागते नक्सलियों को रोकने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के काफी देर बाद सुबह 7:00 बजे डीएसपी वीडी सिंह जेल पहुंचे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन के अधि...

हम नहीं है उम्र के मोहताज

हम नहीं है उम्र के मोहताज......... कहा जाता है की उम्र प्रतिभा की मोहताज नहीं होती और इसी बात को चरितार्थ किया है अनुषा द्विवेदी ने। महज दस वर्ष की उम्र में ही उसने सवा सौ से ज्यादा कविताएं लिखी हैं और वह भी महज एक वर्ष के अंदर। अंग्रेजी में लिखी गई इन कविताओं में उसने रिश्ता, पर्यावरण, मृत्यु, प्रकृति और सड़क पर घूमते बच्चे समेत कई पहलुओं को समेटा है। अनुषा के कविता लिखने का सफर कक्षा दो से ही शुरू हो गया था। पहली कविता लिखकर उसने स्कूल की पत्रिका में छपने के लिए दिया था। इसके बाद यह सफर थम सा गया। अनुषा की मां ज्योति द्विवेदी ने बताया कि 24 अक्टूबर 2009 को उनका जन्मदिन था। अनुषा ने तोहफे में अंग्रेजी में लिखी कविता 'मम्मी' लिखकर दिया। वह हैरान रह गई कि यह कविता अनुषा ने लिखी है। ज्योति और उनके पति नीरद द्विवेदी ने बेटी की प्रतिभा पहचानते हुए उसे प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया। साथ ही समरविला स्कूल की कार्यकारी प्रधानाचार्या एस्थर मणि व अन्य शिक्षिकाओं का भी सहयोग मिला। और अनुषा ने महज छह महीने में सौ से अधिक क...

दही से भी सस्ती हो गई जान..

dilli ka itihaas bahut hi anokha aur gauravshali raha hai lekin aaj kal dilli me jo ho raha hai usne khud dilli ko sharmsar kar diya hai.ab isthiti bil;kul badal gai hai."dilli dil walon ki hai" ye baat galat ho chuki hai ab to dilli gussewalon ki ho gai hai. abhi ek saptah se dilli kuch bachain hai.karan kai ho sakte hain,mahngai,berojgari.ab dekhna dilchasp hoga ki sarkar or dilli police iska thikra kis per phorti hai.roj lut-pat,chori,ladai,aut hatya ki khabron ne dilli ki chavi per daag lagane ka kam kiya hai.sawal ye uthta hai ki jis dilli police ki gungan hoti rahti hai wo aaj kal kar kya rahi hai...khair wo jo bhi kar rahji ho hum dilli walon ko chahiye ki khud ko sambhale.kuch dino pahle gaffar market ke pas ek manager aur pilot ki gadi me takkar ho gai .pilot ne manager ko itna mara ki bechare ki jaan chali gai jabki uski gadi per zara si kharoch aai thi jo kewal 500-600 rupaee me thik ho sakta tha.dusri ghatna me patel nagar me kuch log ande ki dakan pe aayeunhone a...

“फेसबुक के दरबार में दिल्ली नगर निगम”

आधुनिक युग में हर सेवा को आधुनिक बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं. पहले तो सिर्र्फ निजी संस्थान या निजी कार्यालय से ही आधुनिक सेवा मिल पाती थी लेकिन जब जमाना सोशल नेट्वोर्किंग से चलने लगा हो तो अब भला सरकारी कार्यालय इसमें कैसे पीछे रह सकते हैं. अब वह भी निजी संस्थानों की तरह अपनी सेवाओ को चुस्त करना चाहते है तो फिर ऐसे कदमो में दिल्ली वाले कैसे पीछे रह सकते हैं. अब तो आप समझ ही गए होंगे की हम किसके बारे में बात कर रहे है यदि आपने अब भी नहीं समझा तो हम बता दें कि हम दिल्ली नगर निगम द्वारा फेसबुक सेवा की बात कर रहे है जो हाल ही में शुरु की गई है, जिसमे अप बिना किसी सरकारी दफ्तर के धक्के खाए अपनी समस्या दिल्ली नगर निगम क बड़े अधिकरियो तक पंहुचा सकते हैं. इसका तरीका भी काफी सरल है इसके लिए बस आपको अपने फेसबुक खाते में जाकर दिल्ली नगर निगम का लिंक पेज खोलना है जिससे चंद सेकंड में आपकी शिकायत नगर निगम के बड़े अधिकारियों तक पहुँच जाएगी और दिल्ली नगर निगम के बड़े अधिकारी आपकी समस्या का जबाब भी लगभग २४ घंटे में दे देंगे. तो है ना कितना सरल अब दिल्ली नगर निगम में शिकयत...

कालजयी महानायक स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद के जीवन की शुरुआत देखें तो अद्भुत रोमांच होता है। कैसे एक संघर्षशील नवयुवक धीरे-धीरे महागाथा में तब्दील होता चला जाता है। उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणास्पद है। अपनी महान मेधा के बल पर दुनिया में भारत की आध्यात्मिक पहचान बनाने में सफल हुए स्वामी विवेकानंद ने सौ साल पहले जो चमत्कार कर दिखाया, वह आज दुर्लभ है। यह ठीक है कि तकनीकी या आर्थिक क्षेत्र में कुछ उपलब्धियाँ अर्जित करके कुछ लोगों ने यश और धन अर्जित किया है, मगर वह उनका व्यक्तिगत लाभ है, लेकिन स्वामी विवेकानंद ने व्यक्तिगत लाभ अर्जित नहीं किया, वरन देश की साख बनाने में अपना योगदान किया। उनके कारण पूरी दुनिया भारत की ओर निहारने लगी। वेद-पुराणों के हवाले से उन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय चिंतन की नूतन व्याख्या की। ‘लेडीज एंड जेंटलमेन’ कहने की परम्परा वाले देश को उन्होंने यह ज्ञान पहली बार दिया कि बहनों और भाइयों जैसा आत्मीय संबोधन भी दिया जा सकता है। उन्होंने दुनिया को मनुष्य या परिवार का एक सदस्य समझने का संस्कार दिया क्योंकि स्वामी विवेकानंद को यही ज्ञान मिला था। यानी वसुधैव कुटुम्बकम का ज्ञान । स्वामी विवेकानंद क...
उत्तर प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालयों में समाजवादी युवजन सभा और एबीवीपी ने जिस तरीके से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का विरोध किया। जनतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सब को है, लेकिन इस नाम पर अराजकता फैलाना गलत है। वैसे यूपी में राहुल गांधी के प्रति छात्र संगठनों का यह रवैया पहली बार देखा जा रहा है। किसी भी छात्र संगठन ने उनका इस तरह से उग्र विरोध करने का साहस पहले नहीं दिखाया था। तो क्या यह माना जाए कि राहुल गांधी की लोकप्रियता का ग्राफ कुछ गिरा है? संभव है युवाओं के मन में राहुल के प्रति पैदा हो रहे असंतोष ने ही इन छात्र संगठनों का हौसला बढ़ाया हो। दरअसल राहुल अब उस दौर से आगे निकल आए हैं, जब वह एक शो-पीस की तरह देखे जाते थे। युवा उन्हें सुनने से ज्यादा देखने में रुचि दिखाते थे। राहुल उनके लिए राजनेता से ज्यादा एक मॉडल थे, इसलिए उनकी सियासी बातों को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे राहुल ने राजनीति की जमीन पर अपने पैर मजबूती से जमा लिए हैं। उनकी पार्टी ने भी उन पर पहले से ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया है और अब वह कांग्रेस का चेहरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में उनसे...

भ्रष्टाचार की संस्कृति पर गर्व करें

मैं भ्रष्टाचार के भविष्य को लेकर निश्चिंत हूं। यह निर्विवाद सत्य है कि सिर्फ हमारे देश में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के लिए तमाम संभावनाएं व सुविधाएं हैं। हममें ही यह हुनर है कि हम कहीं भी, कभी भी करप्शन की बुनियाद रख सकते हैं। क्षेत्र चाहे राजनीति का हो या संस्कृति का, हम कदाचार के बीज पनपा ही लेते हैं। खुद भी खाते हैं और सामने वाले को भी खाने-दबाने का पूरा मौका देते हैं। यह तो भ्रष्टाचार का पवित्र नियम है कि दूसरे की मुट्ठी गर्म किए बिना, अपनी मुट्ठी गर्म नहीं हो सकती। आज करप्शन पर वही लोग हो-हल्ला मचा रहे हैं, जिन्हें करप्ट होने का मौका नहीं मिला। ज्योंही मौका मिलेगा, वे अपने होंठ सिल लेंगे। यह रीति वर्षों से चली आ रही है। लोग भ्रष्टाचार का विरोध करते हुए इस ताक में लगे रहते हैं कि उन्हें भी कब मलाई का परमानेंट सोर्स मिल जाए। ऐसा होते ही वह भ्रष्टाचारियों की जमात में शामिल हो जाते हैं। देश में भ्रष्टाचारियों की संख्या इसी कारण बढ़ रही है और बढ़ेगी। कुछ लोग तो करप्शन का विरोध इसलिए कर रहे हैं ताकि चर्चा में आ सकें। वे भ्रष्टाचार की संस्कृति को नकारते हैं। अगर कहीं उनसे करप्शन पर क...

पहले भी भ्रष्टाचार हुए है.

हमने बचपन से इतिहास पढ़ा है। इतिहास सब चीजों का होता है।आज मैं भ्रष्टाचार के इतिहास के साथ-साथ कुछ बड़े घोटालों के बारे में कुछ लिखने जा रहा हूँ.... १.बोफोर्स१९८७:-भारतीय राजनीती के इतिहास में बोफोर्स का मामला बेहद चर्चित रहा है। ८० लाख डॉलर दलाली देने के आरोप लगे कांग्रेस सरकार पर। jpc भी बनी. इसने संसद में अपनी रिपोर्ट राखी लेकिन्विपक्ष ने उसे मानने से इंकार कर दिया। २.प्रतिभूति घोटाला 2001:- इस घोटाले ने तो भारत में अब तक हुए घोटालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया दिया। यह था हर्षद मेहता का शेयर घोटाला। १० हज़ार करोड़ का घोटाला। इसमें भी जपक की रिपोर्ट न तो स्वीकार की गई और नहीं पूरी तरह से लागु हो पाई। ३.टेलिकॉम घोटाला,1996:-पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम और रेनू घोष का नाम इस घोटाले के साथ सामने आया। ४.सत्यम घोटाला:-सत्यम computers के मालिक रामलिंगा राजूने ८,०० करोड़ का घोटाला किया। ५.स्टाम्प घोटाला:-२१३ करोड़ ५२ लाख का घोटाला अब्दुल करीम तेलगी ने किया। ६.मधुकोड़ा का महाघोटाला:-झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ने ४००० करोड़ का महाघोटाला किया। ७.आदर्श सोसाइटी घोटाला :-ये ज़मीं सेना की थी,कारगिल ...

विधायक की हत्या

कुछ दिनों पहले प्रकाश झा की राजनीती आई थी । जिसमे दिखाया गया था की पार्टी में टिकेट देने के नाम पर एक महिला का यौन शोषण किया जा रहा है. अंत में महिला उस नेता के दुश्मन के साथ मिल कर उसके खिलाफ साजिश कर रही है।बिहार के पूर्णिया में ठीक उसी तरह की एक घटना सामने आई है . जिसमे रूपम पाठक नाम की एक महिला जो एक प्राइवेट स्कूल चलती थी। वहां के बीजेपी विधायक राजकिशोर केसरी जो की पिछले ३ बार से जीत रहे थे। रूपम पाठक स्कूल से मुख्या सड़क तक के लिए रोअद्फ़ निकलवान चाहती थी । हलाकि कुछ महीनों पहले इस महिला ने विधायक पर यौन शोषण का आरोप लगाया था लेकिन उस समय ये कहा गया था की राजनीती से प्रेरणाग्रस्त है। सब vivadon के बाद परिणाम ने एक बार फिर NDA सरकार और नितीश के खिलाफ विपक्षियों को बोलने का मौका दे दिया है॥ राष्ट्रीय जनता दल के लालो य७अदव ने कहा की ऐसी घटना सही भी हो सकती है और गलत भी क्योंकि राजनीती में ऐसे इलज़ाम प्रायः ही लगाये जाते हैं . मैं राजकिशोरे को जनता था वो बहुत अछे इंसान थे। वही कांग्रेस के एक नेता ने कहा की इससे एक बार फिर विधायकों के सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गएँ हैं। घटना कु...

इक जाम फुर्सत में ....

तू परछाई है मेरी, तो कभी मुझे भी दिखाई दिया कर ऐ जिंदगी ! कभी तो इक जाम फुर्सत में मेरे संग पिया कर मै भी इन्सान हूँ, मेरे भी दिल में बसता है खुदा मेरी नहीं तो न सही, कम से कम उसकी तो क़द्र किया कर इनायत समझ कर तुझको अबतलक जीता रहा हूँ मै मिटा कर क़ज़ा के फासले, मै तुझमे जियूं तू मुझमे जिया कर मेरा क्या है ? मै तो दीवाना हूँ इश्क-ऐ-वतन में फनाह हो जाऊंगा वतन पे मिटने वालों की न जोर आजमाइश लिया कर..............

महंगाई ने मचाई धूम

महंगाई ने मचाई धूम कांग्रेस शासित सरकार ने कई ऐसे कम किये है जिन्हें आम लोग शायद ही भूले। उन सबमे से महंगाई एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए लोग इस सरकार को कभी नहीं भूलने वाले हैं.प्रधानमंत्री जी ने अभी कहा था क नए साल में प्याज की कीमत कम हो जाएगी लेकिन एक बार फिर लोग प्याज की आंसू रोने के लिय मजबूर है। जो प्याज पिछले साल ८० /-तक चला गया था वो धीरे धीरे ३५/- तक पहुच गया था लेकिन नै साल में दुबारा ८०/- पर पहुच गया ... एक बार फिर लोगों क सब्जियों में प्याज की कमी होने लगी है,यही नहीं kitchen me बिना गैस क भी आग लगा हुआ आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता है तो मैं आपको बता दू की गैस क दम में भी ५० रुपये की बढ़त हो गई है...अब ऐसे में रसोई में आग तो लगना ही है न .आग तो ऐसे सरकार के बुद्धि में लगना चाहिए जिसने लोगों के रसोई में आग लगा रखा है.किसी ज़माने में भाजपा क सरकार में भी प्याज की कीमत आसमान छूने लगी थी लेकिन अब उस दर्द को इस दर्द ने कम कर दिया है बल्कि म्कहें तो मिटा ही दिया है.... सरकार पता नहीं क्यूँ इनकी बढती कीमतों पर काबू नहीं पा पारही है...कभी चीनी में आग लग जकाती है,औ...

सीबीआई की असफलता

सीबीआई की असफलता सीबीआई अपने कामो से लगातार अपनी छवि ख़राब करता जा रहा है। ढाई साल तक आरुशी मामले को लटकाने के बाद एकदम हाथ खड़ा कर देना सीबीआई जैसे संसथान के लिए हास्यास्पद है। जिस कम के लिए सीबीआई जैसी संस्था का निर्माण किया गया है अगर वो उसी काम को नहीं कर सकता तो फिर उसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ जाता है। अब सवाल उठता है की अगर सीबीआई को ढाई साल बाद भी कोई सुराग नहीं मिला तो फिर आगे के कामो में उसे कैसे सफलता मिल जाएगी और कोई उस पर क्यों भरोसा करे। कृष्ण तीरथ की माने तो "सीबीआई की इस नाकामयाबी से देल्ही NCR के बच्चो में एक डर पैदा हो जायेगा जिसके कई गलत परिणाम हो सकते है। सीबीआई को इस तरह अपने हाथ खरे नहीं करने चाहिए थे । इस से उसकी छवि भी ख़राब होती है। सरकार की भी छवि पर दाग लग रहा है। "सीबीआई को अब चाहिए की दुबारा से इस कांड की जांच की जाये और दोषियों को बचने के बजाये उन्हें दण्डित करवाए। पहले कोई भी घटना के जांच क लिए लोग सबसे पहले सीबीआई का नाम लेते थे लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद लोग सीबीआई से जांच करवाने से बचेंगे । ऐसे समय में जब राजनितिक महकमों में 2G मामले में भ...