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सीबीआई की असफलता

सीबीआई की असफलता
सीबीआई अपने कामो से लगातार अपनी छवि ख़राब करता जा रहा है। ढाई साल तक आरुशी मामले को लटकाने के बाद एकदम हाथ खड़ा कर देना सीबीआई जैसे संसथान के लिए हास्यास्पद है। जिस कम के लिए सीबीआई जैसी संस्था का निर्माण किया गया है अगर वो उसी काम को नहीं कर सकता तो फिर उसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ जाता है। अब सवाल उठता है की अगर सीबीआई को ढाई साल बाद भी कोई सुराग नहीं मिला तो फिर आगे के कामो में उसे कैसे सफलता मिल जाएगी और कोई उस पर क्यों भरोसा करे।
कृष्ण तीरथ की माने तो "सीबीआई की इस नाकामयाबी से देल्ही NCR के बच्चो में एक डर पैदा हो जायेगा जिसके कई गलत परिणाम हो सकते है। सीबीआई को इस तरह अपने हाथ खरे नहीं करने चाहिए थे । इस से उसकी छवि भी ख़राब होती है। सरकार की भी छवि पर दाग लग रहा है। "सीबीआई को अब चाहिए की दुबारा से इस कांड की जांच की जाये और दोषियों को बचने के बजाये उन्हें दण्डित करवाए। पहले कोई भी घटना के जांच क लिए लोग सबसे पहले सीबीआई का नाम लेते थे लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद लोग सीबीआई से जांच करवाने से बचेंगे । ऐसे समय में जब राजनितिक महकमों में 2G मामले में भी निष्पक्ष जांच के लिए jpc की मांग की जा रही है। सीबीआई को अणि लाज बचने के लिए कोई चमत्कार करना पड़ेगा।

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