सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दही से भी सस्ती हो गई जान..

dilli ka itihaas bahut hi anokha aur gauravshali raha hai lekin aaj kal dilli me jo ho raha hai usne khud dilli ko sharmsar kar diya hai.ab isthiti bil;kul badal gai hai."dilli dil walon ki hai" ye baat galat ho chuki hai ab to dilli gussewalon ki ho gai hai.

abhi ek saptah se dilli kuch bachain hai.karan kai ho sakte hain,mahngai,berojgari.ab dekhna dilchasp hoga ki sarkar or dilli police iska thikra kis per phorti hai.roj lut-pat,chori,ladai,aut hatya ki khabron ne dilli ki chavi per daag lagane ka kam kiya hai.sawal ye uthta hai ki jis dilli police ki gungan hoti rahti hai wo aaj kal kar kya rahi hai...khair wo jo bhi kar rahji ho hum dilli walon ko chahiye ki khud ko sambhale.kuch dino pahle gaffar market ke pas ek manager aur pilot ki gadi me takkar ho gai .pilot ne manager ko itna mara ki bechare ki jaan chali gai jabki uski gadi per zara si kharoch aai thi jo kewal 500-600 rupaee me thik ho sakta tha.dusri ghatna me patel nagar me kuch log ande ki dakan pe aayeunhone anda manga tabhi mukesh ne bhi anda manga aur pahle se aaye ladko ne mukesh ko is liye pita ki usne unse pahle anda kyu manga tha. abhi 3-4 din me hi kai chori aur lut-pat ki ghatnaye samne aai..had to tab ho jata hai jab dahi kharidne k liye ladai ho jati hai or dahi kharidne gaye ladke ko itna pita jata hai ki uski jaan chali jati hai..kya dahi se bhi sasti ho gai jaan.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

खदेरन के पाठशाला 9 : फॉलोवर के बाढ़, अक्ल के अकाल

  ( स्कूल शुरू हो चूका है लेकिन अभी मास्टर साहेब लोग चाय समोसा कचरने में व्यस्त हैं।   बच्चे क्लास को एक साथ क्रिकेट , फुटबाल , कब्बड्डी , कुस्ती के मैदान के साथ- साथ मछली बाजार भी बना के रखे हैं सब ) मोटू - जान जाओ की कल हमारे चाचा एक इंस्टाग्राम का ID बनाये और आज ही 1500 Organic लोग फॉलो कर लिए। ढोंढा - अरे त ई कवन बड़का बात हो गइल , उ सब 1500 लोग तोर घर परिवार आ रिश्तेदार इहे सब में से होइ। मोटू - अरे नानू रे , हमरा परिवार के जवन रहन बा की 50 आदमी फॉलो ना करीहें , ई सब आर्गेनिक ह।   खदेरन - तोर चाचा के नाम अभिजीत चिपके त ना ह ? मोटू - हं उहे हवें हमर चाचा। मंगरु - तोर दादा चाहे दादी में से कोई कबो बापो जनम महाराष्ट्र गइल रहे का रे ? मोटू - ना रे   ! मंगरु - त घेंवड़ा में से तहर चाचा आ गइले महाराष्ट्र में !! मोटू - बोलबे जादा , उहो कॉक्रोच हमहू   कॉक्रोच .... त ओह नाते उ हो गइले हमार चाचा। मंगरु - ...
  "तेरी हिम्मत कैसे हो गई मेरे टॉमी को कुत्ता कहने की? हाऊ डेयर यू..."मालिनी गुस्से से आग बबूला हो गई थी। "बहन जी आप भी कमाल करती हैं कुत्ते को कुत्ता न कहें तो क्या कहें?" आदमी सकपकाया हुआ सा था। मालिनी उसके तरफ उंगली दिखाते हुए बोली-" इसका नाम टॉमी है...कुत्ता नहीं...ये मेरे बेटे जैसा है.....यू स्टुपिड, वी आर एनिमल लवर्स.." इसपर वो आदमी मुस्कुराते हुए बोला-" असल मे आप इसको सिखाओ की जब कोई अनजान आदमी मिले तो ये उसको अपना नाम बताए या फिर इसके गले मे इसका नेमप्लेट लगा दो।" इतना बोलकर वो हंसता हुआ चला गया और मालिनी घंटों तक अंग्रेजी में उसको गालियां देती रही। सोसाइटी का गार्ड दूर से  सब देख रहा था, पास आने पर उसने भी पूछ ही लिया- "क्या हो गया था मैडम?" "स्टुपिड था कोई, इनलोगों के सीने में दिल की जगह पत्थर होता है शायद। खुद देख के चल नहीं सकते और  चोट लगा दी टॉमी को.....और तो और, सॉरी बोलने की जगह कह रहा है कि मैडम अपने कुत्ते को रोड से अलग हटाकर ले चलिए....जैसे इनके बाप की सड़क हो..." गार्ड मन्द-मन्द मुस्कुराता रहा और मालिनी भुनभ...
  सुबह-सुबह का समय था, चिड़ियों के कलरव से वातावरण में मिसरी घुल रही थी। श्याम नहा-धोकर तैयार हो चुका था। आज उसे मां की अस्थियों को विसर्जित करने संगम जाना था। हार से लिपटी हुई कल्याणी की तस्वीर दीवार पर लटक रही थी जिसके ठीक नीचे एक टेबल पर कुछ अगरबत्तियां जल रही थी। उसी के बगल में लाल कपडेसे लिपटा हुआ जो कलश था उसी में कल्याणी की अस्थियां थी। श्याम निकला, मां की तस्वीर को प्रणाम करके कलश लेकर स्टेशन निकल पड़ा।       श्याम की आंख खुली तो संगम पहुंच चुका था। स्टेशन से बाहर निकलकर रिक्शेपर बैठ वो घाट पर पहुंचा और नाव में बैठ बीच धार की तरफ बढ़ा। जाते हुए उसने महसूस किया कि कोई बूढ़ी औरत उसके तरफ देख रही है। जब वो अस्थिविसर्जन करके लौटा तो उस बूढ़ी महिला ने बड़े संकोच से उससे कुछ पैसे मांगे। उसने बताया कि वो भूखी है। श्याम ने उससे ज्यादा बात नहीं कि और चुपचाप सामने वाले ढाबे में चलने का इशारा कर चल पड़ा। उसने देखा कि वो महिला धीरे-धीरे लेकिन एक खुशी के साथ आ रही थी। श्याम ने उसे बिठाया और दो जगह खाना मंगाया। पहले तो उसे लगा कि ये कोई भिखारन है जिनका काम ही पैसे मांगन...