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"हं मां, नहीं सब ठीक है, अभी पार्टी खत्म हुए बस एक घंटा हुआ.....नहीं कोई बहुत बड़ी पार्टी नहीं थी...बस इनके कुछ दोस्त थे और दीदी-जीजा जी.....हं बहुत मजा आया...ठीक है माँ अब जा रहे हैं सोने....सुबह उठ के बहुत सारा काम होगा...पूरा घर फैला हुआ है...ठीक है, प्रणाम माँ.."- फ़ोन रखते हुए शालू ने किचन की लाइट बन्द की और बेडरूम में गई।

  
शालू और चंदन की शादी की दूसरी सालगिरह थी आज। चंदन एक सामान्य आदमी था। एक कपड़े के स्टोर में मामूली अकाउंटेंट की भला क्या औकात! जितना कमाता उसमे घर चलाना भी मुश्किल रहता। लेकिन गांव में लोगों को ये लगता है कि शहर में काम कर रहा है तो लड़का अच्छा ही होगा, अच्छा कमाता होगा और कुछ नहीं तो कम से कम उसकी बेटी को तो शहर में ही रखेगा न। यही सोचकर शालू के मां-बाप ने चंदन से उसकी शादी कर दी थी।
  शालू के पिताजी भी सिंचाई विभाग से रिटायर्ड थे चार बेटियों की शादी में दहेज देकर टूट गए थे इसलिए पांचवी बेटी में भी दहेज की कमी के कारण सामान्य से लड़का ही मिला था। इस कहानी में आगे बढ़ने से पहले दो बातें आपको बता देना जरूरी समझता हूं।
पहला की हमारे देश में बेटे की चाहत में लोग पांच बेटियां भी पैदा कर देते हैं। शालू के माँ-पापा ने भी यही किया था। दूसरी बात ये की हमारे देश में लड़के की नौकरी और सैलरी के हिसाब से दहेज की रकम निर्धारित की जाती है।

चंदन और शालू की शादी तो अरेंज मैरिज थी लेकिन दोनों के आपसी प्यार और बॉन्डिंग को देखर सबको लगता था कि लव मैरिज हुआ है। कौन सा विवाह सही है और कौन सा गलत इसकी खूब बातें होती हैं लेकिन दोनों की अपनी खासियत है, अपना नेचर है। किसी की किसी से तुलना ठीक नहीं।
         
चंदन भले ही कम कमाता हो लेकिन बहुत नेक इंसान था। वो अपनी पत्नी से प्यार बहुत करता था। शालू भी उससे उतना ही प्यार करती थी।  यही कारण था कि कुछ अभावों के बावजूद दोनों बहुत खुशी-खुशी जी रहे थे।

शादी की दूसरी साल गिरह आने वाली थी। शालू ने सोचा कि ये बटन वाला फ़ोन काफी पुराना हो गया है। इसबार इसे ही बदलवा लुंगी। आखिर इस फ़ोन को 4 साल से भी ज्यादा हो गए थे।
    चंदन ऑफिस जाने को तैयार हो रहा था तभी शालू बड़े प्यार से उसके पास आई।  वैसे भी चंदन के नहा कर आने तक शालू उसके कपड़े, जूते और नाश्ता तैयार रखती थी। उसने चंदन से कहा-"सुनिए न, हमरा फोन बहुत पुराना हो गया है। शादी से 2 साल पहले दीदी के लिए आया था। उसकी शादी हुई तो उसने मुझे दे दिया था। अब तो इसके कई बटन भी सही से काम नहीं करते  और आवाज भी बहुत कम आती है। वैसे भी आज के जमाने मे ऐसा फोन किसी के पास नहीं सबके पास बड़े-बड़े एंड्राइड फ़ोन है।"

चंदन नाश्ता कर रहा था, बीच-बीच मे हम्म कर देता। शालू अभी भी चालू थी-"जब भी मैं मायके जाती हूँ तो अपने सहेलियों के बीच इस फोन को नहीं निकलती। क्योंकि सबके पास बड़े-बड़े टच वाले फोन हैं, सब मुझपर हंसने लगेंगी। इसीलिए इसको ऑफ करके कहीं छुपा देती हूं और जब सहेलियां फ़ोन के बारे में पूछती हैं तो बोल देती हूं कि चार्ज में है या बनने को दिया है। लेकिन अब मुझे बहुत शर्म आती है इस फोन को लेकर घूमने में।"

चंदन ने नाश्ता खत्म करते हुए कहा-' ठीक है फिर तुम मेरा फोन ले लो।'
'नहीं आपको तो हमेशा समाज मे रहना है वहां तो अच्छा फोन रहना ही चाहिए'- शालू ने लंच का डब्बा बैग में रखते हुए कहा। 'मैं सोच रही थी कि इसबार हमारी शादी की दूसरी सालगिरह है अगर आप मुझे एक नया फोन दिला देते....."
'तुम तो जानती हो शालू, मेरी सैलरी इतनी है कि बजट से फालतू हजार रुपये भी खर्च करने पड़े तो पूरा बजट हिल जाता है। ये देखो मेरे जूते फट गए हैं। ऑफिस में फ़टे हुए जूते पहन के जाता हूँ लेकिन नहीं ले रहा हूँ क्योंकि सालगिरह पर भी दोस्तों को बुलाना पार्टी करना, खर्चा तो होगा ही न'- चंदन ने अपनी मजबूरी बताते हुए शालू को टाल दिया।

शालू भी मन मारकर चुप हो गई। अभी सालगिरह में डेढ़ महीना बाकी था। शालू ने गुल्लक में कुछ पैसे इकट्ठे करने शुरू किए जो वो हमेशा करती थी।

चंदन भी अपने काम पर पहुँचा। वहां जाकर पता चला कि उसका शोरूम एक बड़े कंपनी के साथ मिलकर एक हफ्ते का क्लॉथ फेयर ऑर्गनाइज कर रहा है। यही सब बातें चल रही थी तभी उसके बॉस ने उसे ऊपर वाले अपने केबिन में बुलाया।
'आओ चंदन, ये हमारे फेयर पार्टनर हैं। इनको इस फेयर के लिए एक अकाउंटेंट चाहिए जो बेहद ईमानदार हो तो मैंने इन्हें तुम्हारे बारे में बताया। क्योंकि तुम मेरे सबसे पुराने और सभे भरोसेमंद स्टाफ हो। क्या तुम शोरूम बन्द होने के बाद क्लॉथ फेयर का काम सम्भाल पाओगे?'- चंदन के बॉस ने बहुत विश्वास के साथ कहा।
बिना समय गंवाए चंदन ने कहा कि वो कर लेगा।फिर बॉस ने बताया कि इसके लिए तुम्हे अलग से 14 हजार रुपये दिए जाएंगे।
चंदन को लगा कि शायद आज भगवान हमारी बातें सुन रहा था तभी उसने एक इंतज़ाम कर दिया। सही कहा गया है कि अगर आप दिल से कुछ करना चाहते हैं तो सब कुछ आपके फेवर में काम करने लगता है। यहां भी वही हो रहा  था।
यही है के एक हफ्ते बहुत मेहनत करना होगा क्योंकि क्लॉथ फेयर शाम के 6 बजे से रात के 12 बजे तक चलनेवाला था। इन दिनों चंदन ने खूब मेहनत की और पैसे बना लिए।
अगले दिन पैसे लेकर निकला तो कदम अपनेआप मार्किट की तरफ हो लिए। एक ही जगह बार-बार मोड़ पड़ने से उसके जूते फट गए थे। जुराब दिखने लगा था। वो जूते की शोरूम के तरफ निकला, रास्ते में ही मोबाइल का शोरूम दिखा। अब उसे अपने फटे हुए जूते का ख्याल नहीं रहा। वो  सीधा मोबाइल की दुकान में गया और एक अच्छा फोन लिया। ठीक वैसा ही जैसा शालू बता रही थी। जिसका कैमरा अच्छा हो, आवाज़ अच्छी हो, वीडियो क्वालिटी भी अच्छी हो। अब उसके पास मात्र दो हज़ार रुपये बचे थे।

आज उसकी शादी की सालगिरह थी। दोस्त आये, अच्छी पार्टी हुई, केक काटा गया ,खा-पी के सब गए।

    "अरे आप फिर मोबाइल में लग गए, चलिए अब इसको रखिए और अब हमको देखिए...."- शालू ने चंदन के हाथ से मोबाइल लेकर रखा और उसकी बाहों में लेट गई।
चंदन ने उसकी तरफ प्यार से देखा और बोला-" अच्छा ये बताओ तुम्हें क्या गिफ़्ट चाहिए?"
"गिफ़्ट, नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए ,बस आपके होंठों पर मुस्कुराहट बनी रहे यही चाहिए।" इतना बोलकर शालू उठी ,चंदन भी उठकर अपने बैग से एक गिफ्ट पैक निकाला।
"ये रहा आपका गिफ़्ट  , पहन कर देखिये अगर सही फिट नहीं आया तो कल चल के बदल लेंगे। "-शालू के चेहरे पर जो खुशी थी उसे देख चंदन भावुक हो गया। उसने अपनी शालू को गले से लगा लिया-" इसकी क्या जरूरत थी, और इसके पैसे कहाँ से आये?"
" गुल्लक को तोड़ कर निकाला मैंने"
"तुमने गुल्लक तोड़ दी?" चंदन को आश्चर्य हो रहा था।
"हं तो आप फाटे हुए जूते पहने तो फिर गुल्लक भर कर फायदा क्या है।"- शालू ने चंदन के गाल पर प्यार वाला चुम्बन लेते हुए कहा।
अब चौंकने की बारी शालू की थी। चंदन ने गिफ्ट आगे किया।
"ये क्या है?" शालू ने डब्बे को पलटते हुए कहा।
"देख क्या रही हो ,खोल कर देखो क्या है?" अब चंदन मुस्कुरा रहा था।
शालू ने खोला और मोबाइल देखते ही उछल पड़ी, फिर एकाएक रुककर बोली -' इतने पैसे कहाँ से आये? ,क्या आपने किसी से कर्ज लिया है?'
'नहीं,, पहले ये बताओ कैसा लगा मेरा तोहफा?'
'लेकिन आपने ये नहीं बताया ये आया कहां से? देखिये अगर आपने इसके लिए किसी से कर्ज लिया है तो फिर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा।'
"अरे नहीं यार, अभी एक हफ्ते मैंने एक्स्ट्रा काम किया था ना, ये उसी के पैसे से लिये हैं।"
शालू उसके गले लगकर न जाने क्यों रोने लगी। ये शायद दोनों का प्यार था। एक दूसरे के प्रति कर्तव्यबोध और प्रेमबोध का अद्भुत मिलन।

----समाप्त----

लव कांत सिंह

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