(स्कूल शुरू हो चूका है लेकिन अभी मास्टर साहेब लोग चाय समोसा कचरने में व्यस्त हैं। बच्चे क्लास को एक साथ क्रिकेट, फुटबाल,कब्बड्डी,कुस्ती के मैदान के साथ- साथ मछली बाजार भी बना के रखे हैं सब)
मोटू- जान जाओ की कल हमारे चाचा एक इंस्टाग्राम का ID बनाये और आज ही 1500 Organic लोग फॉलो कर लिए।
ढोंढा - अरे त ई कवन बड़का बात हो गइल , उ सब 1500 लोग तोर घर परिवार आ रिश्तेदार इहे सब में से होइ।
मोटू - अरे नानू रे , हमरा परिवार के जवन रहन बा की 50 आदमी फॉलो ना करीहें , ई सब आर्गेनिक ह।
खदेरन - तोर चाचा के नाम अभिजीत चिपके त ना ह ?
मोटू- हं उहे हवें हमर चाचा।
मंगरु - तोर दादा चाहे दादी में से कोई कबो बापो जनम महाराष्ट्र गइल रहे का रे ?
मोटू - ना रे !
मंगरु - त घेंवड़ा में से तहर चाचा आ गइले महाराष्ट्र में !!
मोटू- बोलबे जादा , उहो कॉक्रोच हमहू कॉक्रोच .... त ओह नाते उ हो गइले हमार चाचा।
मंगरु - त ओह नाते हम हो गइनी तोर बाप !!
खदेरन - उ कइसे रे ?
मंगरु - काहे की हम सब तेलचट्टा के माई........(बात काटत)
मोटू - ऐ.........................गारी बक देले त बहुते बेंजाये हो जाई।
खदेरन - गारा-गारी एकदम ना.....इ सब बचा के राख जंतर-मंतर पर प्रधान साहेब खातिर काम आई...ना रे मोटुआ?
(इसी बीच मोटू और मंगरु लड़ पड़ते हैं, मंगरु मोटू का फफेली पकड़ के दिवार में दाब रखा है और मोटू उसको गरिया रहा है, खदेरन दोनों को छुड़ाने में लगा है, तभी मंगरु का मुक्का मोटू के गाल पे और मोटू की रोने की आवाज़ आसमान पे , मास्टर साहेब का प्रवेश होता है)
मास्टर साहेब- अरे तुम लोग एकदम जो है सो जी का जंजाल, बात में बवाल, बुद्धि से कंगाल, ज्ञान में टोटा, बातों में खोटा, ऊपर से मोटा है। (सब तीतर बितर हो जाता है बस ये तीनो यही खड़े रह जाते हैं) क्या बात हो गया था जी मंगरु की तुम एकदम मरखाहा सांढ़ जैसे इसको बानूडरी माने देवाल में दबले था ?
मोटू- ए मारसाएब ई तिलेसरा के बेटा हमरा माई के गरियावत रहे।
मंगरु - आ हथिया के बेटा प्रधान के गारी बक सकेला आ जब अपना पर पड़ेला त मरचाई लागता।
मास्टर साहेब - मारेंगे सोटा मुंह बन जाएगा लोटा। .... माने एकदम बेकहल हो गए हो तुम लोग , इहे संस्कार दिए हैं जी , माई-बाप का नाम कहेला नाली में बुड़ा रहा है? चलो भागो , विद्यार्थी हो विद्या का अर्थी मत निकालो नहीं तो एक्के फैट मारेंगे भलभला के बिल्डिंग फेंक दोगे।
खदेरन - बाकी मास्टर साहेब रौवे के न देख के हमनी के सिखेनी आ जब रउरा लोग के डिपार्टमेंट के जनगणना के काम मिलल त रौवे नु मास्टर लोग के रैली में बरहम बाबा के चबूतरा पर चढ़ के सरकार के विरोध में गन्दा गन्दा गारी बकत रहीं।
मास्टर साहेब - जादा बोलले बिना बिसुक रहे हो , एक्के हुड़ा में दांत चियार दोगे। निकालो किताब बेहुद्दा कहीं का ! अब जो गाली खाने वाला कामवा करेगा उ खायेगा नहीं। (सब बच्चों से ) आयं जी ,सही बोले न?
(पिछले बेंच से आवाज़ आई) - काम त राउरो ओइसहिं बा ! (सब बच्चे ठहाका मारने लगे)
मास्टर साहेब - ज्यादा होशियार बने न त एक्जोरांह से सबको धाप देंगे। चलो कल हम बोले थे न की तुम सब किसी २ मुख्य खबर को अपने हिसाब से लिख के लाना (जी सर की आवाज़) तो ठीके है सबसे पाहिले खदेरन तुम्ही खड़ा हो जाओ।
खदेरन - लालू जी के लाल ने दसरथ की जगह जीतन को दी श्रद्धांजलि , मांझी हो गए लाल
मास्टर साहेब - आ बाक ! इ कवनो खबर है ! ऐसा मिस्केट होता रहता है ,खबर देखना है तो दिल्ली देखो। ई सब चाल हम बुझते हैं , तुम सब तेजू भैया को डेनोर्मालाइज करना चाहता है।
खदेरन - मास्टर साहेब हमलोग कल आपको श्रद्धांजलि दे दें त चलेगा न ?
मास्टर साहेब - अक्ल के अंधे, दिमाग के मंदे हो का जी , एगो ज़िंदा आदमी को श्रद्धांजलि देते हुए तुमको लाजो नहीं लगता है।
खदेरन- लागेला बाकी रउवा के देख के भाग जाला। (पूरा क्लास ठहाका मारता है)
मास्टर साहेब - आएंगे न जनगणना करने तब तुम लोगो का नाम साफ़ कर देंगे लिस्ट में से तब बुझायेगा। (गुस्से में जाने लगते हैं)
मंगरु - मारसाएब रउवा त भूराबाल साफ़ करो टीम से नू बानी.....आ ए सर जेकर करिया बा ओकर कैसे करब ?
(मास्टर साहेब गुस्से में पैर पटकते हुए राकेट की तरह निकल लिए)

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