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पाहिले चिट्ठी के जमाना रहे अब फ़ोन आ इन्टरनेट के बा...गाना देखी .....

सइयां भइले निर्मोही ए सखी हो
फ़ोन न उठावे...फ़ोन न उठावे सखी हो
फोने न उठावे
सइयां............

फेसबुक पर लागल रहे
दिन आउर रतिया हो
करेनी चैटिंग खूबे
भेजेनी पातिया हो
कौनो जवाब नाही देला ए सखी हो...
फ़ोन न उठावे
सइयां.............

हाईक पर ऑनलाइन रहे
सब संघतिया हो
राजा से करे चाहीं
प्यार भरल बतिया हो
वाट्सऐप भइल सौतिनिया ए सखी हो...
फ़ोन ना उठावे
सइयां.....

सइयां भइले निर्मोही ए सखी हो
फ़ोन न उठावे...फ़ोन न उठावे सखी हो
फोने न उठावे


(लव कान्त सिंह)

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