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खदेरन के पाठशाला 8
(सभे क्लास में जहां तहां बईठल बा)
खदेरन-जानत बारे ढोंढा भाई...एगो आउर नाया गाना हमार छोटका बाबूजी लिखले ह आ अपना दोस्त से गवईहें..
ढोंढा-सुनाओ मरदे तनी हमनियो के.. एतना त तुही गा लेबे अभी.
लबेदा-रे धरिछ्ना के पोता केंवरिया ओठगा दे ना त माहटर जी आ जइहें..
(खदेरन अलाप लेके शुरू करत बा,जैसे कौनो बड़का व्यास होखो)
दीयरी लेया दी ना सजन जी दीयरी लिया दी ना,
की आइल-3 दीयरी के तेवहार बलम जी दीयरी ले आ दी ना....
(मास्टर साहेब गेट खोल के प्रवेश)
मास्टर साहेब-रे इ केंवारी लगा के कौन मजमा लगाईले है जी तुम सब भागो अपना अपना बेंच प नहीं त हूंक के जियान क देंगे...ए खदेरन तुम खाड़ा होखो,ढेर ब्यास बनोगे त जानते हो की नहीं हम लगेंगे गवाने त सब सुर बेसुरा कर देंगे..
खदेरन-ऐ मास्सायेब रउरा पाहिले गीतवा के भाव सुनी तब नु..
मास्टर साहेब-हम का सुनी....आरे हम त अपना ज़माना के टॉप ब्यास रही पुछिह अपना बाबूजी से..
ढ़ोंढा-ह मारसयेब साँचो पहिले गीतवा के भाव जान जाई...भाव ई बा की दियरी से दिवाली मनावे के चाहीं,चाईनीज भुकभुकवा बत्ती से ना...
मास्टर साहेब-ह नु जतना बन्हिया उ सतरंगिया बत्ती लागेला उ कबो दिया के होई. कतना बन्हिया खल खल के रौशनी करेला..हम त पढ़े साल भी इहे बत्ती लगाईले रहनी आ अबकियो चाइनीज बत्ती ही लगायेम...चारो तरफ घर के लगा दिहिला त नाया कनिया नियर सज जाले हमार घर.
खदेरन-उ त ठीक कहनी मास्सयेब बाकी कबो सोचनी ह की हमनी के संस्कृति दीयरी जरावे के ह आ एकर विज्ञानिक कारण त रउवा विज्ञानं में पढ़लही होखेम..
मास्टर साहेब-ना पढले रहती त तोहरा के पढ़ावे कईसे आइति...ढेर होसियार जन बन खदेरन जी
ढोंढा-मारसयेब उ गलत थोड़े कहत बाड़न..
खदेरन-मास्सयेब रउवा से होशियार के होई...बाकी हम त चाहत बानी की हमनी पूरा स्कूल से राय क के रउवा अगुआई में गाँव-शहर घूम घूम के दीयरी इस्तेमाल खातिर अभियान चलावल जाओ...आ कलाटर साहेब के एगो बड़के दिया भेंट क दियाओ...कईसन रही?
मास्टर साहेब-(चिढावत)कईसन रही...आरे बुड़बक शहर में आजकल त आउर काउनो दीया नहीं पूछता है सब....देहाती के देहातिये रह जाओगे,आरे आगे बढ़ो..आगे !
खदेरन-हई देखत बानी मास्सयेब हई धरिछन दा के पोता ह,फाटल जामा पेन्ह के आइल बा पढ़े,जानत बानी काहे...काहे की रउवा नियर बहुत लोग आगे बढ़ गइल आ हेकर दादा आज ले माटी के बर्तन आ दीयरी बनावेलें,बाकी खरीद्निहार नईखे...शादी बियाह में 10 गो हँड़िया,ढकना बेच लेला से का हो जाई,पईसा के कमी से ई फाटल पेन्हले बा आ आज पूरा कुम्हारटोली में दुए जाना माटी के काम करेला लो बाकी सब दिल्ली-पंजाब ध लेहल लोग काहे की रउवा नियर लोग आगे बढ़ गइल...एकरा घरे तकारी बनला पनरहियन हो जाला आ परब तीज का होला इ खाली देखले बाडन स..जब राउर लईका दिवाली में नया कपड़ा पेन्ह के पड़ाका फोरी तब ई खाली देख के खुश होईहें स...एहिसे अगर हमनी माटी के दीयरी आ दोसर सब चीज खरीदेम स तब नु एकरो दिवाली मनी.
मास्टर साहेब-तुम जरुर नेता बनोगे भाषण बन्हिया दे देता है जी
ढ़ोंढा-ए मारसयेब आ भुक्भुक्वा सब चाइना से आवता त बताई की हमनी अपना देश के दुश्मने के नु पई सा देतानी स,ओसे त बहुत बन्हिया बा की कुम्हार लोग के दियाओ आ दीयरी किनावो.
मास्टर साहेब- ढ़ेर पाठ मत पढाओ तुम लोग,अब उ गरीब है आ दोसर काम नहीं करता है त इसमें हम का करेंगे.
खदेरन-ऐ मासस्येब राउर दादा आ बाबु जी सबका घरे पूजा-पाठ कराईले नु आ मान ली की लोग पूजा-पाठ करावल छोड़ देवे चाहे मन्त्र के केसेट बजा के पूजा क लेवे त ओहुलो के दिक्कत आई की ना...आ आज जौना गाछी से आम बेच के लाखो कमाइला ई मुखिया काका के दान कइल ना ह..समाज के एही हिसाब से बानवल बा की सभे एकदुसरा के मदद करत रहो आ जीयत रहो..
मास्टर साहेब-बात त तुम ठीक कह रहा है लेकिन तुम्हारा इतना हिम्मत की हमरा बाप-दादा प चल गया,बईठो जल्दी ना त अभी बहुत खीस में है, सब खीस तुम्ही प उतार देंगे।

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