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खदेरन के पाठशाला 7

(ढेलवा फाटक बाबा के लड़िका नथुनी के भुईयाँ पटक के मार रहल बा,बाकी लोग लिलकारता आ थपरी पीट-पीट के माजा ले रहल बा,मास्टर साहेब के साथे खदेरन के एंट्री होता,सब लोग भाग के अपना सीट पर पहुँच जाता आ ढ़ेलवा आ नथुनी धरा जाता)

मास्टर साहेब-ऐ,काहे मारा-मारी होता..हम 5 मिनट लेट का हो गइनी भुभुनरंगौवल चालू...(दुनु के 4-4सोटा) अब बताओ तुम लोग काहे झगड़ा कर रहा था।
ढ़ेलवा-मास्टर साहेब नथुनिया हमरा माई-बहिन के गरियावत रलक ह।
नथुनी-ना मारसायेब इहो हमरा के गरीयवलक ह।
मास्टर साहेब-ऐ जी तुम लोग पढने आता है की गारा-गारी करने...अब से सुन लिए त मार के पीठास फार देंगे,हई देखो खदेरन को वाद-विवाद प्रतियोगिता में जीत के हमारा नामवा रोसन करके आया है आ तुम लोग अभी गारीये-फकरी में लागल हो...
खदेरन-हम जानत रनी ह की एक दिन ई होई काहे की 5-7 दिन से एक्नी ओल-बोल मारत रलन ह स।
मास्टर साहेब-ऐ नथुनी तुम बताओ जी का बात है,खड़ा होक बोलो...
नथुनी-मारसायेब ई गरिया देलें ह त हम मार देनी ह।
मास्टर साहेब-आरे त हम उहे नु पूछ रहे हैं की ई काहे गरियाया है भांग खाके नहीं नु आया होगा...
ढ़ेला-गुरुजी हम बतावत बानी,जबसे गुजरात के हार्दिक पटेलवा आरक्षण ला मांग करत बा तबसे ई लो रोज हमरे प ना बाकी लोग प भी ऒल-बोल मारत रलन ह...की आरक्षण ना रहित त तहनी आजो हमनी के नोकर रहते स,आरक्षण बैसाखी ह बाकी आज के बात प हम इनका के मरनी ह आज कहले ह की तोहनी के पुर्वज के माई-बहिन भी हमनी के घरे कमात रली ह स आ तहनी में कईगो बाल-बच्चा हमनी के पुर्वज के रहे.
नथुनी-ह खाली हमही कहनी ह का तू हु त कहले ह की तहनी के भी घर के मेहरारू लोग के कईगो लईका मजदूरे स के रहत रलक।
मास्टर साहेब-बाप हो बाप हतना बोलनिहार हो गईल लो आरे आतना इतिहास किताब के ना पता होई बाकी हई न देखा..इ सब आरक्षण प होता,आरक्षण त गलत बड़ले बा।
खदेरन-मास्टर साहेब रउवा गलत कहत बानी आरक्षण गलत नइखे अब के हिसाब से ओमे सुधार के जरुरत बा...आरक्षण के फायदा छेदीया के आजी से पूछी,बेचारी सबके लईका भैला प नार काटत रली आ जबसे सबके लईका होस्पिटल में होखे लागल तबसे उहो काम गइल,अब खेत में बनिहारी करेली अगर आरक्षण ना रहीत त ओकर बेटा कईसे मास्टर बनित,आज देखी छेदिया के बाबूजी के कारण घर भर के लईका पढ़त लिखत बा ना त दिन भर गरहा में मछरी मारत रहिते स...तार छेवे आला हरिहर मांझी के लईका डीएसपी बन गइल त पूरा टोला तारी बेचल छोड़ के पढाई करे लागल आ आज 5 गो सरकारी नोकरी आला बा पासी टोला में,,आरक्षण के ढेर फायदा बा जेकरा के बताई त ढेर समय लागी..एमे बदलाव करे के जरुरत बा की आर्थिक स्थिति के आधार पर भी आरक्षण पर ध्यान दिहल जाओ काहे की आज बहुत सवर्ण भी मदद के लायक बा...
मास्टर साहेब- आरक्षण के हम त विरोधी बानी...बाकी हेकनी के का कहीं,,इतना इतिहास एक्नी के बतवले के होई...!!अबसे सुन लेनी ऐसन बात त दुनु जाना के नाम काट के भगा डेम स्कूल से।
ढ़ेलवा-इ हमरा के गरीयाईहन त हम इंकार आरती नानू उतारेम।
नथुनी-रे जोना तरकारी बेच....आरती ते का उतरबे।
मास्टर साहेब-हमरा रहते तुम लोग लड़ने लगा एतना मार मारेंगे न की सब जातिवाद भुलवा देंगे...आरक्षण का हम भी विरोध करते हैं इसका मतलब ई नहीं न है की दुसरे को गरियायेंगे।
खदेरन-ए मास्टर साहेब अगर विरोधी बानी त नोकरिया छोड़ ना दी काहे की रउरो त विकलांग ना रहला के बादो नकली कागज़ बनवा के विकलांग आरक्षण के लाभ लेलही बानी...
मास्टर साहेब-बईठो बुड़बक कहींका मास्टर से जबान लड़ाता है...!!

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