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बिहार के शान - शहीद स्मारक पटना

                            बिहार के शान - शहीद स्मारक पटना 

बिहार के राजधानी पटना के 3000 बरस के गौरवशाली इतिहास आज भी भारत देश खातिर गौरव के बिषय बा। ई प्राचीन नगर पवित्र गंगानदी के किनारे सोन आ गंडक के संगम पर लम्हर पट्टी के रुप में बसल ब। पटना के इतिहास पाटलीपुत्र के नाम से छठी सदी ईसापूर्व में शुरू भईल आ तीसरी सदी ईसापूर्व में पटना शक्तिशाली मगध राज्य के राजधानी बनल। अजातशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चंद्रगुप्त द्वितीय, समुद्रगुप्त ईहाँ के महान शासक भइलन। ऐतिहासिक इमारत होखे आ चाहे ऐतिहासिक राजवंश, ज्ञान होखे आ चाहे अध्‍यात्‍म आ चाहे कुछ प्रबुद्ध यात्री जइसेे मेगास्थनिज, फाह्यान, ह्वेनसांग के आगमन,ई सब के साक्षी बा पटना शहर। महानतम कूटनीतिज्ञ कौटिल्‍य आपन अर्थशास्‍त्र आ विष्णुशर्मा आपन पंचतंत्र के रचना इहईं कइले रहस।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी पटना के अहम भुमिका रहल। बिहार विधान सभा के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बनल स्मारक पटना के स्कूलन से आजा़दी के लड़ाई में जान देवेवाले सात शहीदन के प्रति श्रद्धांजली बा। 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के समय विधान सभा भवन के ऊपर भारतीय तिरंगा फहरावे के प्रयास में मारल गईल पटना के ई शहीदन के याद रखे खातिर बिहार के पहिला राज्यपाल जयरामदास दौलतराम 15 अगस्त 1947 मंे स्मारक के नींव रखलें। प्रख्यात मूर्तिकार श्री देवीप्रसाद रायचैधुरी द्वारा ई भव्य आदमकद मूर्तियन के ईटली में बनाके इहाँ लगावल गईल। आज भी जेतना पयर्टक लोग पटना आवेला लोग उ लोग बिना इहां घुमले ना जाला लोग। एकरा अलावा कोई भी छात्र गतिविधि होला त ओकर शुरूआत एही स्मारक के भिरी से होला।
सन बयालीस के अगस्त क्रांति के आज खाली ‘‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’’ चाहे ‘‘करो या मरो’’ के क्रांतिकारी नारा खातिर याद कईल जाला। बाकि वास्तविकता एतनी सा नईखे। क्रांतिकारीयन पर बरपावल क्रूरतम अत्याचार के कहानी पटना में स्थापित ‘‘शहीद स्मारक’’ के आज भी आवे-जाए वाला लोगे से सुना जाला। 11 अगस्त 1942 के सांझ के पटना सचिवालय पर तिरंगा फहरावे के इरादा से गइल एगो जुलूस पर पटना जिला के कलेक्टर आर्चर गोली चलवाइलस। सात लोग मारल गइलन आ अनेक घायल भइलें। ई शहीद स्मारक सात शहीदन के स्मृति में बा, जौन कि सब स्कूल के विद्यार्थी रहलें। बिहार में ‘‘अगस्त क्रांति’’ के व्यापकता के एगो बड़ कारण रहे छात्रन के हत्या से उपजल भारी जनरोष।
सचिवालय गोलीकाण्ड में शहीद सात महान बिहारी सपूत-
१. उमाकान्त प्रसाद सिंह- सारण जिला के नरेन्द्रपुर गाँव के निवासी उमाकान्त प्रसाद सिंह राम मोहन राय सेमीनरी स्कूल मंे इंटर के छात्र रहनी। इनकर पिता राजकुमार सिंह रहलें।

२. रामानन्द सिंह- इहाँके राम मोहन राय सेमीनरी स्कूल पटना मंे इंटर के छात्र रहनी।  इनकर जनम पटना जिला के गाँव शहादत नगर में भइल रहे । इनकर पिता लक्ष्मण सिंह रहले।
३. सतीश प्रसाद झा- सतीश प्रसाद के जनम भागलपुर जिला के खड़हरा में भइल रहे । इनकर पिता जगदीश प्रसाद झा रहले। इहाँ के पटना कालेजियट स्कूल के इंटर के छात्र रहनी ।
४. जगपति कुमार- ई महान सपूत के जनम गया जिला के खराठी गाँव में भइल रहे ।
५. देवीपद चैधरी- ई महान सपूत के जनम सिलहर जिला के अन्तर्गत जमालपुर गाँव में भइल रहे । इहाँके मीलर हाईस्कूल के ९वीं कक्षा के छात्र रहनी ।
६. राजेन्द्र सिंह- ई महान सपूत के जनम सारण जिला के बनवारी चक गाँव में भइल रहे। इहाँके पटना हाईस्कूल के इंटर के छात्र रहनी ।
७. राय गोविन्द सिंह- ई महान सपूत कै जनम पटना जिला के दशरथ गाँव में भइल रहे। इहाँके पुनपुन हाईस्कूल के इंटर के छात्र रहनी ।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद एह जगहा पर शहीद स्मारक के निर्माण भइल । एकर शिलान्यास स्वतन्त्रता दिवस के बिहार के प्रथम राज्यपाल जयराम दौलत राय के हाथ से भइल । औपचारिक अनावरण देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 1956 ई. में कईलन। भारत छोड़ो आन्दोलन के क्रम में बिहार में 15,000 से जादा लोग बन्दी बनावल गइलंे, 8,783 के सजा मिलल आ 134 लोग मारल गईल रहे।

- लव कान्त सिंह

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