पूर्वांचल के वैष्णोदेवी
भक्त रहसु के पुकार पर प्रकट भईल मां दुर्गा के महिमा के कहानी ईहां के कण-कण में रसल बा। चेरो वंश के समय से पूजल जाए वाली माई दुर्गा के ई पवित्र स्थल केे अब पर्यटन के नक्शा पर भी चमकावे के योजना बा, ई स्थान बा - थावे भवानी। अईसे त बिहार में धार्मिक यात्रा पर आवे वाला आ चाहे छुट्टी मनावे आवे वाला लोगन खातिर ईहां कय गो धार्मिक आ पौराणिक स्थल बा, बाकि ईहां आवे वाला लोग गोपालगंज जिले में स्थित थावे मंदिर में जाके सिंहासिनी भवानी माई के दरबार के दर्शन करके उनकर आर्शीवाद लेवल ना बिसरालें। अइसन मानल जाला कि ईहां आवे वाले श्रद्धालुअन के सब मनोकामना माई पूरा करेली। गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब छौ किलोमीटर दूर सिवान जाए वाला रास्ता पर थावे नाम के एगो स्थान बा, जहां माई थावेवाली के एगो पुरान मंदिर बा। माई थावेवाली के सिंहासिनी भवानी, थावे भवानी आ रहसु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारेला। ओइसे त सालो भर ईहाँ माई के भगत लोग आते रहेले बाकि शारदीय नवरात्र आ चैत्र नवारात्र के समय ईहां श्रद्धालुअन के भारी भीड़ लाग जाला। देश के 52गो शक्तिपीठन में से एक इ मंदिर के पीछे एगो पुरान कहानी बा।
पुरनिया लोग के कहनाम के मुताबिक राजा मनन सिंह हथुआ के राजा रहले। उनका घमण्ड रहे कि उ दुर्गा माई के सबसे बड़का भगत बाड़ें। घमण्ड भइला के कारण अपना सामने उ केहू के भी मांई के भगत ना मानत रहले। थावे में कमाख्या देवी मांई के एगो सच्चा भगत रहसु रहत रहे। काथा के अनुसार रहसु माई के कृपा से बाघ के बैल आ साँप के रस्सी के जगह जोते लगले आ उहाँ के लोग के अन्न मिले लागल, बाकि राजा के विश्वास ना भईल। राजा रहसु के ढोंगी बतावत मां के बोलावे के कहले। रहसु कई बेर राजा से प्रार्थना कईलन कि अगर माई ईहां अईहन त राज्य बर्बाद हो जाई, बाकि राजा ना मनले। रहसु के प्रार्थना पर माई असाम के कमाख्या स्थान से चलके ईहां चहुँपली । कहल जाला कि माई कमाख्या से चलके कलकाता में काली के रूप में , पटना में पटन देवी के नाम से जानल गईली, छपरा जिला के आमी में अमिका भवानी के रूप में दर्शन देते थावे पहुंचली आ रहसु के मस्तक के चीड़ के साक्षात दर्शन देली। दर्शन करते ही राजा के सब भवन गिर गईल आ राजा के मौत हो गईल।
माई जहां दर्शन देले रहली, उहां एगो भव्य मंदिर बा आ कुछ ही दूरी पर रहसु भगत के भी मंदिर बा। मान्यता बा कि जे माई के दर्शन खातिर आवेला से रहसु भगत के मंदिर में भी जरूर जाला ना त उनकर पूजा अधूरा मानल जाला। ऐही मंदिर के लगे आज भी मनन सिंह के भवन के खंडहर भी मौजूद बा जवना में अब शादी बियाह होला आ लोग आराम करेला। मंदिर के आसपास के लोग के अनुसार ईहां के लोग कौनो भी शुभ कार्य के पहिले आ ओकरा पूरा हो गईला के बाद ईहां आवे के ना भूलाले। ईहां माई के भगत प्रसाद के रूप में नारियल, पेड़ा आ चुनरी चढ़ावेले। माई के आर्शीवाद पावे खातिर कौनो महंगा चीज के आवश्यकता नईखे। माई खाली भगत के भक्ति आ श्रद्धा देखेली। उनका खाली प्यार आ पवित्रता के जरूरत रहेला।
मंदिर का गर्भ गृह बहुते पुराना बा। तीन तरफ से जंगल से घिरल ई मंदिर में आज तक कौनों छेड़छाड़ नईखे कईल गईल। नवरात्र के सप्तमी के मां दुर्गा के विशेष पूजा कईल जाला। एह दिन मंदिर में भक्त भारी संख्या में पहुंचेले।
मां थावेवाली के मंदिर के पूरे पूर्वांचल आ नेपाल के मधेशी प्रदेश में अईसने ही ख्याति बा जईसे मां वैष्णोदेवी के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बा। लेकिन अफसोस के बात ई बा कि एतना महत्त्वपूर्ण स्थान भईला के बादो ई स्थान विकास के मामला में राज्यसरकार के द्वारा उपेक्षित रह गईल बा। आशा बा कि आवे वाला साल में ई स्थान आम जनता आ प्रशासन के सहयोग से समुचित विकास करी आ मां थावेवाली के पवित्र स्थल विश्व-मानचित्र पर आपन साख बना लिही।
राष्ट्रीय राजमार्ग 85 के किनारे स्थित थावे मंदिर सीवान जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर बा। छपरा आ सीवान से ईहाँ कई गो सवारी गाड़ी आवेले। गोरखपुर जक्शन से भी इहाँं आवे खातिर कईगो गाड़ी खुलेला। इहाँ पहुंचे खातिर जिला मुख्यालय से चैबीसो घंटा वाहन मिलेला।
लव कान्त सिंह

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