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चिदम्बरम का बयान

चिदम्बरम का बयान
भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ अनेकता में एकता है। लेकिन राजनितिक दलों द्वारा बार-बार इसकी अखंडता को भंग करने साजिश रची जाती हैऔर कुछ हद तक उन्हें सफलता भी मिल जाती है। आज़ादी के बाद से आज तक भारत पर सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी अंग्रेजों की निति "फूट डालो शासन करो " के तर्ज़ पर काम करता आया है। बार-बार क्षेत्रवाद ,जातिवाद और धर्म के नाम लोगों को लड़ाया गया है ताकि उनका राजनितिक स्वार्थ पूरा होता रहे ।
मुंबई में राज ठाकरे जैसे लोगो को पैदा करने का काम भी कांग्रेस की रणनीति में शामिल होता है। वहां उम
नके कन्धों पर बन्दूक रख कर तो असम में अपने एजेंटों के माध्यम से वो हिंदी भाषियों पर अत्याचार करवाती है ताकि वहां उसका वोपते बैंक बनता रहे। लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी भारत के अखंडता पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
एक बार फिर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बाद भारत के गृहमंत्री पी चिदम्बरम ने ये कह कर की -दिल्ली में बढ़ रहे अपराध के लिए बहरी लोग जिम्मेवार हैं -इस बहस को ताज़ा कर दिया है। हालाँकि इस बयान के कारणों के दो मतलब हो सकते हैं। पहला यह की चिदम्बरम दिल्ली पुलिस की नाकामयाबी पर पर्दा डालना छह रही होंया मिडिया का ध्यान भटकने की कोशिश की जा रही है। दूसरा यह की अभी-अभी बिहार में हुए विधान सभा चुनाव में बिहार की जनता ने कांग्रेस को ज़बरदस्त पटकनी दी हों सकता है उसका गुस्सा और दर्द ही ऐसे बयानों के रूप में बहार आ रहा हो
खैर, भारत की जनता अब इनसे भी ज्यादा समझदार हो चुकी है उन पर अब ऐसी चीजों का कोई negative असर नहीं डालती बल्कि एकता को मज़बूत करने का ही काम करती है.

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