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मैं जामिया में पत्रकारिता का छात्र हूँ । इसलिए मेरे क्लास में अक्सर किसी मुद्दे पर बात होती है । कल अपराध के मुद्दे पर बात होते -होते पाकिस्तान मुद्दे पर चली गई । कुछ लोगों का कहना था की एक लड़ाई जरुरी है कश्मीर मुद्दे क लिए। कुछ लोगो का कहना था की लड़ाई से कुछ भी भला नहीं होगा। मेरा ये मानना है की कभी- कभी लड़ाई भी ज़रूरी हो जाती है और कई मामले उसके बिना सुलझ ही नहीं सकते। मेरे साथी राय साब का ये मानना था की एक लड़ाई से देश कई साल पीछे चला जाता है। मैं खुद भी येही मानता हूँ लेकिन अगर इतिहास को देखा जाये तो जापान पूरी तरह बर्बाद हो चूका था लेकिन आज भारत से ही नहीं कई बड़े देशों से बहुत आगे है।

देखते ही देखते बात-चीत बहस में तब्दील हो गया ,मैंने कहा-"कूटनीति ये कहती है की अगर कुछ नुकसान के बाद बहुत अच्छा परिणाम निकले जो उस नुकसान से बहुत बड़ा हो तो उस नुकसान को उठाने में कोई हर्ज़ नहीं। " ऐसा नहीं है की मैं कोई कुटनीतिज्ञ हूँ,लेकिन ये भजी सच है की कूटनीति के अनुसार ऐसा ही होता है। एक और सज्जन थे जिन्होंने कहा की गलती अटल जी की है कारगिल क वक़्त ही सेना चाहती तो उनको आगे तक खदेर सकती थी लेकिन उन्होंने रोक दिया।
आप क्या मानते हैं ?

टिप्पणियाँ

  1. law kant jee apke baton se bilkul sahamat hun par abhi ladai ki koi jarurat nahi hai .agar bhai ganda ho yatang kare to iska matlad ye nahi ki uska astitw hin khatam kar de .or chote logo ke parsan karne se bada paresan hone lage to dukh ki bat hai ,hathi ki tarah hamre desh ko bhi age badhana chahiye naki pakistan se ulajhana chaheye .

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