सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

                                        रंगमंच के वो दिन  रंगमंच के वो दिन जब सभागार में लोगो की भीड़ और लाइट के बीच stage  पे आता था तो ऐसा लगता था की यही मैं हूँ ............       नाटक - क्युकी ससुर भी कभी दामाद था 
               हम त खाली एगो कुर्सी बानी  ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh tsdjk yk yksx ejsyk rb;kj ck ekM+ - ihV]yM+kbZ - >xM+k][kqu - [kjkck b lc r budj gfFk;kj ck HkkbZ HkkbZ Hkh ubZ[ks jgr vk nksLr Hkh nq”eu gks tkr ck ,djk yk ge ftEesokj ub[kha dkgs fd -- ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh                                                        ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh                             tsdjk yk lc yksx vkQ+r esa iM+y ck                 ...
गाँव कि एक कविता.. जो कविता कम वास्तविकता ज्यादा है  मेहरारू- काहे नईख आवत रजऊ हमके बताव आव चाहे जन आव पईसा पेठाव मँहगा बाजार बा तेल तरकारी राहतो त मिलत नईखे कवनो सरकारी 90 रूपे दाल बाटे कईसे पकाईं छूछहूँ त भात रोजे नाहीं घोटाई चीनी त मिलते नईखे कतहूँ बजारी में कईसे लाईं सौदा अब त देत ना उधारी में घर के गेहूँ सध गईल सध गईल चाऊर हो अतना में चलत नईखे भेज तनी आऊर हो बाड़का के पैट फाटल मझीला उघाड़े बा छोटका के कुछो नईखे खेलत ऊ दुआरे बा टूटली पलनिया कईसे छवाई अबकि भादो पहिले रउआ आईं --------------------------- मरद- काहे नईखीं आवत सजनी तहके बताईं आवे से पहिले तनिका पईसा त जुटाईं काम त बहुते बाटे रोजे जागाड़ी में पईसा बाकि मिलत नईखे जात बा उधारी में करकट में रहत बानी संघें बाड़ें साढू हो चोखा-रोटी खात बानी मिलत नईखे दारू हो कुछहूँ बुझात नईखे कईसे बताईं पईसा नईखे लगे हम कईसे आईं  ----------लव कान्त सिंह---------

छात्रों के प्रति साजिश की जा रही है-विवेक

छात्र राजनीती , जिसे मुख्यधारा की राजनीती का लौंच पैड कहा जाता है आज खतरे में है। लिंगदोह कमिटी की सिफारिशों ने राजनीती की नर्सरी को बहुत नुकसान पहुचाया कई। kai ऐसे प्रमुख विश्वविद्यालयों में चुनाव बंद है जो देश को अच्छे-अच्छेराजनेता,विचारक और शिक्षाविद देती है। इस पुरे प्रकरण क लिए एक कहावत फिट बैठती है-"खेत खाए गधा,मार खाए जोलहा"।दरअसल केरल के एक विश्वविद्यालय में बढ़ रहे मार-पीटऔर गुंडागर्दी के कारण जे.एम.लिंगदोह की अध्यक्षता में कमिटी बिठा दी। इसी कमिटी ने अपनी सिफारिश दी,जिसके विरोध में JNU,DU जैसे विश्वविद्यालय में चुनाव रोक दिया गया। डी.यू में तो उन्ही शर्तों पर चुनाव करा लिया गया लेकिन जे.एन.यू में पिछले ३ साल से चुनाव बंद है। जे.एन.यू के छात्रों ने लिंगदोह की कुछ सिफारिशों पर घोर आपत्ति जताई और प्रशासन ने चुनाव बंद करा दिया। JNU-ABVP के महामंत्री विवेक विशाल का कहना है की-"ये सब छात्र राजनीती को बंद करने की साजिश है। इसमें दो राइ नहीं की कैम्पस में चुनाव न होने की वजह से पूरी की पूरी बैच बिना राजनीती देखे ही निकल जाएगी । ऐसा माना जाता है की छात्र राजनीती से ही...

ये उदारता कहीं ले न डूबे

निश्चित रूप से भारत सनातनी परंपरा का देश है और ‘अतिथि देवो भव’ का संस्कार हमारी रगों में समाया है। पिछली सहस्राब्दियों में हमने अनगिनत समुदायों को अपने यहां प्रश्रय दिया। अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण जब यहूदी और पारसी अपने मूल स्थान पर सताए जा रहे थे तो हमने बाहें फैला उनका स्वागत किया। उन्हें हमारे देश में वह आजादी मिली जो वे अपनी मातृभूमि में खो चुके थे। अतीत की यह उदारता कहीं न कहीं आज भी हमारे समाज में विद्यमान है। अगर ऐसा नहीं होता तो अफगानी, बर्मी, तिब्बती तथा श्रीलंकाई शरणार्थियों की बड़ी संख्या हमारे देश में भला आज कैसे चैन से रह पाती। यहां इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि जहां हमने अपने आतिथेय (मेजबान) होने का धर्म निभाया तो वहीं इन समुदायों ने अपने अतिथि धर्म का भी बखूबी पालन किया। हमारे और अपने हितों में टकराव की स्थिति उन्होंने कभी पैदा नहीं होने दी। लेकिन पिछले कुछ दशकों से एक समुदाय ने हजारों सालों की इस आदर्श स्थिति को तार-तार कर दिया है। यह समुदाय है बांग्लादेशियों का। 1971 में जब उन्हीं के धर्म और उन्हीं के ‘राष्ट्र’ के लोगों ने मानवता की सारी हदे...

आरोपी फरार

३६ सुरक्षा कर्मियों की हत्या का आरोपी फरार........ झारखंड के चाईबासा जिले में लचर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाते हुए तीन कुख्यात नक्सली रविवार देर रात मंडल कारागार से भाग निकले। ये माओवादी 36 सुरक्षाकर्मियों की हत्या के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं। पुलिस ने फरार नक्सलियों की धर-पकड़ के लिए पूरे प्रदेश में अभियान छेड़ दिया है। पुलिस के अनुसार फरार हुए नक्सली निर्भय उर्फ रघुनाथ हेंब्रम को सन 2007 में और संदीप उर्फ मोती लाल सोरेन को सन 2009 में गिरफ्तार किया गया था। जबकि धीरेन महतो उर्फ उत्तम को बीते दिसंबर महीने में धनबाद से इस जेल में लाया गया था। बताया गया है कि रात में निर्भय ने अस्वस्थता की शिकायत कर संतरी से दवा मांगी थी। संतरी दवा लाने के लिए गया। इसी दौरान मौके का फायदा उठाते हुए तीनों नक्सलियों ने ताले को काटकर दरवाजा खोल लिया। भागते नक्सलियों का हथियारबंद संतरी से आमना-सामना भी हुआ। लेकिन संतरी ने गोली चलाने के बजाय केवल शोर मचाकर भागते नक्सलियों को रोकने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के काफी देर बाद सुबह 7:00 बजे डीएसपी वीडी सिंह जेल पहुंचे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन के अधि...

हम नहीं है उम्र के मोहताज

हम नहीं है उम्र के मोहताज......... कहा जाता है की उम्र प्रतिभा की मोहताज नहीं होती और इसी बात को चरितार्थ किया है अनुषा द्विवेदी ने। महज दस वर्ष की उम्र में ही उसने सवा सौ से ज्यादा कविताएं लिखी हैं और वह भी महज एक वर्ष के अंदर। अंग्रेजी में लिखी गई इन कविताओं में उसने रिश्ता, पर्यावरण, मृत्यु, प्रकृति और सड़क पर घूमते बच्चे समेत कई पहलुओं को समेटा है। अनुषा के कविता लिखने का सफर कक्षा दो से ही शुरू हो गया था। पहली कविता लिखकर उसने स्कूल की पत्रिका में छपने के लिए दिया था। इसके बाद यह सफर थम सा गया। अनुषा की मां ज्योति द्विवेदी ने बताया कि 24 अक्टूबर 2009 को उनका जन्मदिन था। अनुषा ने तोहफे में अंग्रेजी में लिखी कविता 'मम्मी' लिखकर दिया। वह हैरान रह गई कि यह कविता अनुषा ने लिखी है। ज्योति और उनके पति नीरद द्विवेदी ने बेटी की प्रतिभा पहचानते हुए उसे प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया। साथ ही समरविला स्कूल की कार्यकारी प्रधानाचार्या एस्थर मणि व अन्य शिक्षिकाओं का भी सहयोग मिला। और अनुषा ने महज छह महीने में सौ से अधिक क...