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‘‘गिरमीटिया भारतवंशी‘‘ के सफल मंचन

                        ‘‘गिरमीटिया भारतवंशी‘‘ के सफल मंचन   ‘‘गिरमीटिया भारतवंशी‘‘ के दर्द उहे समझ सकेला जेकरा कभी अपना जमीन से अलग रहे के पड़ल होखे।आज़ादी के पहिले फिरंगियन के एगो जहाज़ लगभग 34 साल तक लगातार भारत से फिजी,मौरिशस आ दूसर देश के चक्कर लगावत रह गईल रहे। जेमे भारत के मजदूर से काम करावे खातिर मजदूरन के खेप विदेश भेजल गईल।लेकिन फिरंगियन के धोखा के कारण केहु लौट ना पावल आ उहईं बसे पर मजबूर होखे के पड़ल।कुछ लोग लौटल भी बाकि बदलल भारत में भी उनका लोग के तिरसकार,धोखा आ लूट-पाट के अलावा कुछ ला मिलल।इहे सब घटना के नाटक रूप बा ‘‘गिरमीटिया भारतवंशी‘‘ जेकर लेखक बाड़ें राजेश कुमार माँझी ।भोजपुरी के प्रसिद्ध रंगकर्मी श्री महेन्द्र प्रसाद सिंह के निर्देशन में ई लघु नाटक के सोलहग रूप देलें । लक्ष्मी नगर के पुर्वा संस्कृति केन्द्र के सभागार में 20 सितम्बर 2013 के रंगश्री के कलाकारन के द्वारा ई नाटक के मंचन भईल। अखिलेश पांडे,सौमित्र वर्मा,लव कान्त सिंह,अंजु सिंह,रविशंकर,महिमा,लक्ष्मी,मीना राय आ शैलेन्...

ऐतिहासिक धरोहर है बिहार की पहचान

 बिहार की पहचान इसके गौरवशाली इतिहास व ऐतिहासिक धरोहरों से है। वहीं देखरेख के अभाव में कई धरोहरें अपना वजूद खोने लगी हैं। ऐसी ही एक धरोहर है रोहतास जिले के सासाराम स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा, जिसकी नींव भीतर से कटती जा रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। अफगानी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना शेरशाह का मकबरा अपनी सुरुचिपूर्ण सौम्यता के लिए प्रसिद्ध है। अपने छोटे से शासनकाल (वर्ष 1540-1545 ईस्वी) को इतिहास के एक अहम कालखंड के रूप में स्थापित करने वाले शेरशाह सूरी को समूचे भारतीय मध्ययुग के सबसे महत्वपूर्ण शासकों में गिना जाता है। कोलकाता से पेशावर तक ग्रैंड ट्रंक (जीटी) रोड बनवाने व भारतीय रुपए के प्रथम संस्करण ‘रुपया’ का चलन शुरू करने, एक व्यवस्थित डाक व्यवस्था शुरू करने के साथ ही कई ऐतिहासिक कार्य शुरू करने के लिए प्रख्यात शेरशाह सूरी ने 15वीं सदी में सासाराम में एक तालाब के बीच मकबरा बनवाया था। अफगान वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना होने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1998 में इस मकबरे को विश्व धरोहरों की सूची में स्थान दिया। यह मकबरा 1130 फीट लंबे व 865 फीट चौड़े तालाब के म...

कॉमरेड बदल रहा है

  कॉमरेड बदल रहा है  मेरे मन का कॉमरेड अब बदल रहा है- सुबह-शाम,दिन-रात सब बदल रहा है जब सब बदल रहा है तो- मन क्यूँ न बदले परिवर्तन के सिद्धांत से  होकर प्रभावित- एक कॉमरेड बदल रहा है  लम्बे बाल कट गए बेतरतीब दाढ़ी हट गए  कला कुरता,बेरंग थैला लाल झंडी-तख्ती-बैनर सब कोने में रख दिया अब मैं जोश से लाबा लब गला फाड़ के नाड़े नही लगता पुलिस पर पत्थर भी नहीं फेंकता- एक कॉमरेड बदल रहा है  अगर ये परिवर्तन की निशानी है  तो खुश हूँ मैं जिस समाज से भागता था उसी में शामिल हूँ मैं उब को सुरक्षा और दोहराव को स्थायित्व  अब नहीं मानता मैं मन की धुन को भूल कर आँखों से देखने लगा हूँ मैं- एक कॉमरेड बदल गया है... 
                                        रंगमंच के वो दिन  रंगमंच के वो दिन जब सभागार में लोगो की भीड़ और लाइट के बीच stage  पे आता था तो ऐसा लगता था की यही मैं हूँ ............       नाटक - क्युकी ससुर भी कभी दामाद था 
               हम त खाली एगो कुर्सी बानी  ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh tsdjk yk yksx ejsyk rb;kj ck ekM+ - ihV]yM+kbZ - >xM+k][kqu - [kjkck b lc r budj gfFk;kj ck HkkbZ HkkbZ Hkh ubZ[ks jgr vk nksLr Hkh nq”eu gks tkr ck ,djk yk ge ftEesokj ub[kha dkgs fd -- ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh                                                        ge r [kkyh ,xks dqlhZ ckuh                             tsdjk yk lc yksx vkQ+r esa iM+y ck                 ...
गाँव कि एक कविता.. जो कविता कम वास्तविकता ज्यादा है  मेहरारू- काहे नईख आवत रजऊ हमके बताव आव चाहे जन आव पईसा पेठाव मँहगा बाजार बा तेल तरकारी राहतो त मिलत नईखे कवनो सरकारी 90 रूपे दाल बाटे कईसे पकाईं छूछहूँ त भात रोजे नाहीं घोटाई चीनी त मिलते नईखे कतहूँ बजारी में कईसे लाईं सौदा अब त देत ना उधारी में घर के गेहूँ सध गईल सध गईल चाऊर हो अतना में चलत नईखे भेज तनी आऊर हो बाड़का के पैट फाटल मझीला उघाड़े बा छोटका के कुछो नईखे खेलत ऊ दुआरे बा टूटली पलनिया कईसे छवाई अबकि भादो पहिले रउआ आईं --------------------------- मरद- काहे नईखीं आवत सजनी तहके बताईं आवे से पहिले तनिका पईसा त जुटाईं काम त बहुते बाटे रोजे जागाड़ी में पईसा बाकि मिलत नईखे जात बा उधारी में करकट में रहत बानी संघें बाड़ें साढू हो चोखा-रोटी खात बानी मिलत नईखे दारू हो कुछहूँ बुझात नईखे कईसे बताईं पईसा नईखे लगे हम कईसे आईं  ----------लव कान्त सिंह---------

छात्रों के प्रति साजिश की जा रही है-विवेक

छात्र राजनीती , जिसे मुख्यधारा की राजनीती का लौंच पैड कहा जाता है आज खतरे में है। लिंगदोह कमिटी की सिफारिशों ने राजनीती की नर्सरी को बहुत नुकसान पहुचाया कई। kai ऐसे प्रमुख विश्वविद्यालयों में चुनाव बंद है जो देश को अच्छे-अच्छेराजनेता,विचारक और शिक्षाविद देती है। इस पुरे प्रकरण क लिए एक कहावत फिट बैठती है-"खेत खाए गधा,मार खाए जोलहा"।दरअसल केरल के एक विश्वविद्यालय में बढ़ रहे मार-पीटऔर गुंडागर्दी के कारण जे.एम.लिंगदोह की अध्यक्षता में कमिटी बिठा दी। इसी कमिटी ने अपनी सिफारिश दी,जिसके विरोध में JNU,DU जैसे विश्वविद्यालय में चुनाव रोक दिया गया। डी.यू में तो उन्ही शर्तों पर चुनाव करा लिया गया लेकिन जे.एन.यू में पिछले ३ साल से चुनाव बंद है। जे.एन.यू के छात्रों ने लिंगदोह की कुछ सिफारिशों पर घोर आपत्ति जताई और प्रशासन ने चुनाव बंद करा दिया। JNU-ABVP के महामंत्री विवेक विशाल का कहना है की-"ये सब छात्र राजनीती को बंद करने की साजिश है। इसमें दो राइ नहीं की कैम्पस में चुनाव न होने की वजह से पूरी की पूरी बैच बिना राजनीती देखे ही निकल जाएगी । ऐसा माना जाता है की छात्र राजनीती से ही...