बिहार की पहचान इसके गौरवशाली इतिहास व ऐतिहासिक धरोहरों से है। वहीं देखरेख के अभाव में कई धरोहरें अपना वजूद खोने लगी हैं। ऐसी ही एक धरोहर है रोहतास जिले के सासाराम स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा, जिसकी नींव भीतर से कटती जा रही है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। अफगानी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना शेरशाह का मकबरा अपनी सुरुचिपूर्ण सौम्यता के लिए प्रसिद्ध है। अपने छोटे से शासनकाल (वर्ष 1540-1545 ईस्वी) को इतिहास के एक अहम कालखंड के रूप में स्थापित करने वाले शेरशाह सूरी को समूचे भारतीय मध्ययुग के सबसे महत्वपूर्ण शासकों में गिना जाता है। कोलकाता से पेशावर तक ग्रैंड ट्रंक (जीटी) रोड बनवाने व भारतीय रुपए के प्रथम संस्करण ‘रुपया’ का चलन शुरू करने, एक व्यवस्थित डाक व्यवस्था शुरू करने के साथ ही कई ऐतिहासिक कार्य शुरू करने के लिए प्रख्यात शेरशाह सूरी ने 15वीं सदी में सासाराम में एक तालाब के बीच मकबरा बनवाया था। अफगान वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना होने के कारण संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1998 में इस मकबरे को विश्व धरोहरों की सूची में स्थान दिया। यह मकबरा 1130 फीट लंबे व 865 फीट चौड़े तालाब के म...